कार्तिक स्नान की कहानी 1| Kartik Sanan Ki Kahani

By | October 22, 2019

कार्तिक स्नान बुढ़िया माई की कहानी 1

एक बुढिया माई थी जों चातुर्मास में पुष्कर स्नान किया करती थी | उसके एक बेटा और बहु थी | सास ने बहु को सैगार  { उपवास में खाने योग्य } बनाने को कहा तो बहु ने जमीन के पापडे बांध दिए | बेटा माँ को पहुचाने के लिए पुष्कर गया | रास्ते में माँ से बोला माँ सैगार कर ले | जहाँ पानी मिला वही सैगार  करने बेठ गई तो पापडे फलाहार बन गये | पुष्कर माँ के रहने के लिए झोपडी बना  कर  बेटा वापस घर  आ गया | रात्रि में श्रावण मास आया और बोला बुढिया माई दरवाजा खोल तब बुढिया माई से  पूछा तू कोन है ? मैं श्रावण  , बुढिया ने तुरंत दरवाजा खोल दिया | बुढिया ने शिव पार्वती की पूजा अर्चना की बेलपत्र से  अभिषेक किया जाते समय श्रावण ने झोपडी के लात मारी झोपडी की एक दीवार सोने की हो गई |

भाद्रपद मास आया उसने भी दरवाजा खोलने को कहा , बुढिया ने दरवाजा खोला सत्तु बना कर कजरी तीज मनाई भाद्रपद भी लात मार गया तो दूसरी दीवार हीरे की हो गई |

फिर आशिवन मास आया और उसने भी दरवाजा खोलने को कहा , बुढिया ने दरवाजा खोला , पितरो का तर्पण कर ब्राह्मण भोज करा कर श्राद्ध किया  | नव रात्रि में माँ दुर्गा को अखंड ज्योति  जलाकर प्रसन्न किया सत्य की विजय दिवस के रूप में बुराई का अंत की ख़ुशी में  दशहरा मनाया | आशिवन मास ने लात मारी और तीसरी दीवार भी बहुमूल्य रत्नों से जडित हो गई |

इन सब के बाद  कार्तिक मास आया उसने भी दरवाजा खोलने को कहा | बुढिया ने दरवाजा खोला अति प्रसन्न मन से कार्तिक स्नान किया दीपदान कर दीवाली , गोरधन पूजा , भईया दूज , आवला नवमी मनाई | कार्तिक मास ने जाते समय लात मारी तो झोपडी के स्थान पर महल बन गया | बुढिया तन मन धन से गरीबो की सेवा कर भजन कीर्तन में अपना समय व्यतीत करने लगी | बेटा अपनी माँ को लेने आया तो माँ और झोपडी को पहचान न सका तो पड़ोसियों से पूछा | उन्होंने बताया तो बेटा माँ के चरणों में गिरकर बोला माँ घर चलो | सारे  सामान के साथ घर ले आया |

सास के ठाठ देखकर  बहु के मन में लालच आ गया और उसने अपनी माँ को भी पुष्कर छोडकर आने को कहा तो उसका पति अपनी सास को भी छोड़ आया | और सास चार समय भोजन करती और दिन भर सोती चारो मास आये और चले गये जाते जाते झोपडी को लात मारी और झोपडी गिर गई और बहु की माँ गधी की योनि में चली गई क्यों की ओरत लक्ष्मी का रूप है और लक्ष्मी की तरह चंचल होना चाहिए भगवान की पूजा और अतिथि का समान करना चाहिए |

बहु ने कहा अब माँ को ले आवो ,जब जवाई सास को लेने गया तो कही न मिली , लोगो से पूछने पर लोगो ने बताया की तेरी सास धर्म कर्म कुछ न करती थी खाती थी और सोती थी जिससे वह गधी बन गई | जवाई गधी [ सास ] को बांध  कर घर ले आया  उसकी पत्नी ने पूछा मेरी माँ कहा है तब पति ने कहा तेरे लालच की वजह से तेरी माँ गधी बन गई |

बड़े बड़े विद्वानों ,ब्राह्मण ,ऋषि ,मुनियों से पूछने पर उन्होंने बताया की तेरी सास  के स्नान किये पानी से स्नान करने पर उसे मनुष्य योनि मिलेगी | तब बहु ने ऐसा ही किया और उसकी माँ पुन: मनुष्य योनि में आ गई | हे ! राधा – दामोदर भगवान जेसा बुढिया माई को दिया वैसा सबको देना कहता न , सुनता न , हूकारा भरता न म्हारा सारा परिवार न |

इस कहानी के बाद कार्तिक मास की नंबर  2 कहानी , इल्ली घुण की कहानी , तुलसी जी की कहानी , राम लक्ष्मण की कहानी , पीपल पथवारी की कहानी , लपसी तपसी की कहानी सुने |

|| वन्दे विष्णु ||        || वन्दे विष्णु ||          || वन्दे विष्णु ||

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