कार्तिक मास में राम लक्ष्मण जी की कहानी | Kartik Mas Me Ram Lkshmn Ji Ki Khaani

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Last updated on October 22nd, 2019 at 09:08 pm

 राम लक्ष्मण जी की कहानी

भगवान श्री राम लक्ष्मण और सीता जी पिता दशरथ जी की आज्ञा से वनवास जाने लगे | रास्ते में सभी तीर्थ गंगा , यमुना , गोमती नदियों में पितृ तर्पण कर वन में कंद मूल , फल फूल खाते हुए वन में अपना समय व्यतीत करने लगे | कार्तिक का महिना आया एकम के दिन लक्ष्मण जी ने राम जी की आज्ञा से फल फूल लाकर माँ सीता को दिए तब माँ सीता ने चार पतल परोसी तब लक्ष्मण ने पूछा भाभी माँ हम तीन हैं फिर चार में क्यों परोसा तब माँ सीता बोली एक पतल गों माता की हैं |

राम जी , लक्ष्मण जी , गोंमाता को पतल परोस दी तब राम जी ने पूछा सीता जी आप ने खाना शुरू क्यों नहीं किया | तब सीता माँ बोली मेरे तो राम कथा सुनने का नियम हैं राम कथा सुनने के बाद ही में फल ग्रहण करूंगी | तब रामजी बोले मुझे कथा सुनादो , लक्ष्मण जी बोले मुझे सुनादो तब माँ सीता बोली ओरत की बात ओरत सुने आप  मेरे पति हो , आप मेरे देवर हो आपसे कैसे कहूँ | तब लक्ष्मणजी ने सोचा इस जंगल में कौन ओरत मिलेगी तब लक्ष्मण जी ने अपनी माया से एक नगरी का निर्माण किया उस नगरी में सब सुख सुविधाओ से युक्त थी उस नगरी में सब चीजे सोने की थी इसलिये नगरी का नाम सोन नगरी रखा | सभी नगर निवासियों को घमंड हो गया उस नगरी में कोई गरीब नहीं था | जब सीता जी कुंवे पर पानी लेने गई और पनिहारिनो से राम राम किया तो कोई नहीं बोली थोड़ी देर में एक छोटी कन्या आई सीता जी उससे राम राम बोली और कहा की बाई राम कथा सुनेगी क्या तब वह बोली मेरे तो घर पर काम हैं सीता जी ने कहा मेरे पति राम और देवर लक्ष्मण भूखे हैं , तब लडकी बोली मेरी माँ मेरा इंतजार कर  रही हैं | वह लडकी वहां से जानी लगी तब माँ सीता के क्रोध से सारी नगरी साधारण सी हो गई जब लडकी घर गई तो माँ बोली बाई ये क्या हुआ | तब लडकी बोली मेरे को तो पता नहीं हैं | वहां पर एक साध्वी बैठी थी मुझे राम कथा सुनने के लिए बोली पर में तो कथा नहीं सुनी |यदि उसने कुछ किया हो तो पता नहीं | तब उसकी माँ ने उसको वापस जाकर कथा सुनने को कहा , लडकी ने वापस जाकर कथा सुनने से मना कर दिया तब उसकी बहु बोली आपकी आज्ञा हो तो में कहानी सुन कर आती हूँ | जब बहु कुंवे पर गई तो पानी भरे और खाली करे तब सीताजी ने कहा आपके घर पर कुछ काम नहीं हैं क्या ? तब वह बोली माताजी में तो सारा काम करके आई हूँ | तब माँ सीता बोली तू मुझे माँ कहकर बुलाई यदि तुझे समय हो तो मेरी राम कहानी सुन लेगी तब वह बोली माताजी कहानी सुनाओ मैं प्रेम से कहानी सुनूंगी |

 

चन्दन चौकी मोतिया हार | राम कथा म्हारे हिवडे रो आधार ||

राम कथा सुनाऊ राम ने मनाऊं | राम कहे तो प्रदेश में जाऊ ||

सीताजी ने कहा हे बाई ! तूने मेरी मृत्युलोक में मदद करी भगवान तेरी स्वर्ग लोक में रक्षा करेंगे |

सीताजी ने राम कथा सुनाई बाई ने कथा सुनी –

आवो राम बैठो राम | जल भर झारी लाई राम |

केला री दातुन लाई राम | ठंडा जलभर लाई राम सम्पाडो पधरावो राम |

झगल्या टोपी ल्याई राम | कड़ा किलंगी लाई राम |

स्वर्ण सिंहासन लाई राम | तापर आप बिराजो राम |

झालर टिकारा लाई राम | शंख ध्वनी गरणाऊ राम |

हिवडे हीरा सोंवे राम | निरखता मन मोहे राम |

चरण शरण में आई राम | शरण आपरी ले ल्यो राम |

माखन मिस्री ल्याई राम | माखन मिश्री आरोगो राम |

दूध भर कटोरी लाई राम | मेवा चिरंजी परोसू राम |

खाती मीठी चाखां राम | चरखो फरखो आरोगो राम |

रुच रुच भोग लगाओ राम | जो भावे सो लेल्यो राम |

जल भर झारी ल्याई राम | अबै आचमन करल्यो राम |

रे स्याम गमछो ल्याई राम | हाथ मुंह पौछ्ल्यो राम |

पुष्पा सु सेज बिछाऊ राम | अंतरिया छिड़काऊं राम |

हिंगलू डोल्या द्लाऊं राम | सीताजी चरण दबावे राम |

सुखभर सेज पोढो राम | हाजर पंखा ढोलू राम |

थामें राम , महामे राम | रोम रोम में राम ही राम |

घट घट माय बिराजो राम | मुख में तुलसी बोलो राम |

खाली मिजाज काई काम | जब बोलो जब राम ही राम |

बोलो पंछी राम राम , पुरण होवे मंगल काम |

राम कथा पूर्ण हुई तो सीता जी ने कहा ! हे बाई तूने मेरी राम कथा सुनी , मेरी सहायता की राम जी लक्ष्मण को  जिमाया हैं भगवान तेरी भी रक्षा करेंगे | तुझे स्वर्ग का सुख मिलेगा | सीता माता ने उपहार स्वरूप अपने गले का हार दे दिया | जब वह  घर गई  तो उसके मटका सब सोने के हो गये | सासु जी ने कहा ये सब तू कहा से लाइ में माँ सीता से राम कथा सुनी ये इसी का फल हैं | सासुजी ने कहा प्रतिदिन राम कथा सुन आना |

बाई को रामकथा सुनते बहुत दिन हो गये तब उसने माँ सीता से पूछा इसका उद्यापन विधि बतलाओ | तब सीता जी ने कहा सात लड्डू लाना , एक नारियल लाना उसके सात भाग करना , एक भाग मन्दिर में चढ़ाना जिससे मन्दिर बनवाने जितना फल होता हैं | एक भाग सरोवर के किनारे गाड देना जिससे सरोवर खुदवाने जितना फल होता हैं | एक भाग भगवद्गीता पर चढ़ाना जिससे भगवद्गीता पाठ करवाने जितना फल होगा | एक भाग तुलसी माता पर चढ़ाना जिससे तुलसी विवाह जितना फल होगा | एक भाग कंवारी कन्या को देवे जिससे कन्या विवाह जितना फल होगा | एक भाग सूरज भगवान को चढाना जिससे तैतीस करौड देवी देवता को भोग लगाने जितना फल होगा | अब उसने विधि पूर्वक उद्यापन कर दिया | माता सीता के पास आई माता मेने तो विधिपूर्वक उद्यापन कर दिया | अब सात दिन बाद वैकुण्ठ से विमान आएगा |

सात दिन पुरे हुए विमान आया तो बहूँ ने कहा  सासुजी स्वर्ग से विमान आया हैं तब सासुजी ने कहा बहूँ तेरे ससुरजी को व् मेरे को भी ले चल , तेरे माता पिता को ले चल सारे कुटुंब परिवार को ले चल , अड़ोसी पड़ोसी को ले चल बहूँ ने सबको बिठा लिया पर विमान खाली था |

थोड़ी देर में उसकी नन्द आई और देखते ही देखते विमान भर गया तब बहूँ ने कहा माँ सीता नन्द बाईसा को भी बिठा लो पर माँ सीता ने कहा इसने कभी कोई धर्म पुण्य  नहीं किया | तब बहूँ ने कहा बाईसा आप पहले कार्तिक मास में राम लक्ष्मण की कथा सुनना उसके बाद आप के लिए वैकुण्ठ से विमान आएगा |

गाँव के सरे लोग एकत्र हो गये और पूछने लगे बाई तूने ऐसा कौनसा धर्म पूण्य  किया गीता भगवद्गीता के पाठ  किये हमें भी बताओं तब बाई ने कहामैंने तो माता सीता से प्रतिदिन राम कथा सुनी और नियम से उद्यापन किया | तब समस्त ग्रामीण राम कथा सुनने की जिद्द करने लगे | तब बाई राम कथा कहने लगी और सब नर नारी सुनने लगे , राम कथा सम्पूर्ण होते ही समस्त नगरी सोने की हो गई | बाई ने कहा जो कोई राम कथा सुनेगा उसको मेरे समान ही फल मिलेगा | सब राम लक्ष्मण जी की जय जय कार करने लगे और विमान स्वर्ग में चला गया |सात स्वर्ग के दरवाजे खुल गये | पहले द्वार पर नाग देवता , समस्त देवी देवता पुष्प वर्षा करने लगे देवताओं ने पूछा की तूने क्या पुण्य किया तब उसने कहा  मैंने तो राम लक्ष्मण जानकी की कहानी सुनी तू समस्त देवताओं ने कहा वर मांग तब उसने कहा मेरे तो सब सिद्धिया हैं | मुझे यह वर दो की जो भी श्रद्धा व् भक्ति से राम कथा , राम लक्ष्मण जानकी की कहानी सुनेगा उसको मेरे समान ही फल मिले सभी देवताओं ने पुष्प वर्षा करते हुए ततास्तु कहा | चारों और राम राम की जय जयकार होने लगी |

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