गोगा नवमी पूजन विधि , गोगा नवमी कथा 2019 | Goga Navmi Pujan Vidhi , Goga Navmi Katha2019

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Last updated on August 9th, 2019 at 04:17 pm

गोगा नवमी पूजन विधि , गोगा नवमी कथा

Goga Navmi Pujan Vidhi , Goga Navmi Katha

गोगा नवमी का महत्त्व

25 अगस्तरविवारभाद्रपद कृष्ण पक्ष ९ , १० गोगा नवमी

गोगा नवमी जन्माष्टमी के दुसरे दिन मनाई जाती हैं | हिन्दू धर्म में गोगा नवमी का विशेष महत्त्व हैं |

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को गोगा नवमी का त्यौहार मनाया जाता हैं , जिसे ” गोगा नवमी “ के नाम से जाना जाता हैं अश्वारोही योद्धा के रूप उनकी पूजा की जाती हैं | गोगाजी के स्थान पर सर्प की आकृति खुदी हुई होती हैं इनका स्थान खेजड़ी के पेड़ के नीचे होता हैं | गोगाजी को नागराज का अवतार माना जाता हैं | गोगाजी के बारे में कई सारी कहावते प्रचलित हैं |

 

‘ गाँव गाँव खेजड़ी गाँव गाँव गोगो ‘

गोगा नवमी पूजन विधि

गोगा नवमी के दिन कुम्हार अश्व पर सवार गोगाजी की मूर्ति बनाकर घर घर ले जाते हैं |

जहाँ उनकी पूजा रोली , मोली , अक्षत , नारियल से  होती हैं |

रक्षाबन्धन पर बाँधी गई राखियाँ खोलकर गोगा जी के चरणों में अर्पित की जाती हैं |

खीर , लापसी ,  पुड़ी – पुए , चूरमे का भोग लगाया जाता हैं |

स्त्रियाँ घर की दीवारों पर सर्पाकार आकृतियां बनाकर रोली , अक्षत से पूजा करती हैं |

और सामूहिक गीत गाती हैं |

ऐसी मान्यता हैं की यदि किसी के घर पर सर्प निकल जाये तो गोगाजी को कच्चे दूध का छिटा लगा देते हैं , जिससे सर्प बिना हानि पहुचाये चला जाता हैं , जिस घर में गोगा जी की पूजा होती हैं उस घर के लोगो को सर्प नहीं काटता गोगाजी पुरे परिवार की रक्षा करते हैं | गोगाजी में लोगो अत्यधिक हैं |

राजस्थान में गोगाजी का प्रमुख स्थान गोगामेडी हनुमानगढ़ जिले के नोहर उपखंड में स्थित हैं तथा दूसरा स्थान ददेवरा चुरू जिले में हैं | इन दोनों स्थानों में गोगा नवमी को विशाल मेले का आयोजन किया जाता हैं | राजस्थन में तो स्थान स्थान पर गोगाजी के स्थान हैं तथा मेले का आयोजन व गोगाजी का पूजन अर्चन किया जाता हैं |  ‘ गोगा पीर ‘ व  ‘ जाहिर वीर ‘के जयकारो के साथ इनके गुरु गोरख नाथ जी की जय जयकार होती हैं | इनकी पूजा आराधना सभी धर्मो के लोग करते हैं |

 गोगा नवमी कथा

राजस्थान के लोकदेवता गोगाजी का जन्म गुरु गोरखनाथ के वरदान से हुआ था | गोगाजी की माँ बाछल देवी नि: सन्तान थी | सन्तान प्राप्ति के सभी यत्न करने पर भी सन्तान सुख़ नहीं मिला | गुरु गोरखनाथ ‘ गोगामेडी ‘ के टीले पर तपस्या कर रहे थे | बाछल देवी उनकी शरण में गई तथा गुरु गोरखनाथजी ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया और एक गूगल नामक फल प्रसाद रूप में दिया | प्रसाद खाकर बाछल देवी गर्भवती हो गई और नवे महीने पुत्र प्राप्ति हुई | यही बालक गोगाजी के नाम से प्रसिद्ध हुआ | गूगल फल के नाम से इनका नाम गोगाजी पड़ा |

|| जय बोलो गोगा जी की जय ||

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