दशमाता व्रत दूसरी कहानी 2

एक बुढिया माई थी वह बहुत गरीब थी उसके एक बेटा था | बुढिया माई ने खूब मेहनत करके लागो के घर में काम करके बेटे को बड़ा किया | एक दिन बुढिया माई ने अपने बेटे से कहा बेटा अब तू बड़ा हो गया कुछ कमा क्र ला अब मेरे से काम नहीं होता मेरी हड्डिया कमजोर हो गई हैं | लड़का माँ की बात सुण कर काम की खोज में निकल पड़ा | गाँव के बाहर एक कुटिया में उसे जानवरों की देख भाल के लिए रख लिया | वह जब जानवरों को पानी पिलाने कुवे पर गया तो वहा ओरते दशमाता व्रत की कहानी सुण रही थी | कहानी सुण ने के लिए 9 ओरते तो हो गई दशवी ओरत नही हैं तो ओरतो ने लडके से पूछा की ओ भाई तेरे घर में कौन कौन हैं | तब लडके ने कहा मेरे घर में तो मेरी माँ हैं और में हु | तब ओरतो ने पूछा हमारे एक ओरत कम हैं क्या तू खानी सुन लेगा | तब लडके ने कहा हा क्यों नहीं में कहानी सुन कर डोरा मेरी माँ को दे दूंगा | सारि सामग्री लेकर चला गया और माँ को सब सामान   देकर कहानी आगन लिप कर दशामाता की कहानी नो दिन सुन ली दशमाता माता बुढिया माई का रूप धर कर दशमाता आई और बुढिया माई से पानी माँगा तो बुढिया माई अंदर पानी लेने गई इतनि देर में दशमाता ने सोने का घडा क्र दिया | बुढिया माई के पीछे पीछे चली गई रस्ते में बेटा मिला पूछा माँ आप कहा जा रही है | तो लडके को सारी बात बता दी | बुढिया माई को सोने की झारी पाचू कपड़ा मिल गया | सोने के महल माल्या बन गया | तब बुढिया माई बोली हे दश माता आपकी कृपा से सब सुख हो गये पर मेरे तो बहूँ नही हैं तब दशमाता ने सुंदर सी बहु दी आला गिला बास कटा कर लडके का विवाह कर दिया | लडके के नवे महीने एक लड़का हो गया बहु व बुढिया माई दशमाता का व्रत हर साल धूम धाम से करती रहीं | कुछ समय बाद बुढिया माई मर गई | बुढिया माई की बहु विधिविधान से दशमाता का व्रत करती रही | एक दिन दशमाता बुढिया माई की बहूँ की परीक्षा लेने आई | दशमाता फटे कपड़े फन क्र बहु से बाई पानी पिला दे बहूँ ने दशमाता को पहचान लिया और पाँव पकडकर बैठ गई | दशमाता बोली बाई तूने तो मुझे पहचान लिया | में तेरी से बहुत प्रसन्न हु सो कुछ मांग ले तब बहु बोली हे दशमाता जो भी श्रद्धा भक्ति से तेरा व्रत करे उसके घर में अन्न धन के भंडार भरना | दशमाता ततास्तु कहकर अंतर्ध्यान हो गई | दशमाता का डोरा खंडित नहीं होना चाहिए | यदि डोरा खंडित हो जाये तो धुप करके दूसरा डोरा पहनना चाहिए | जब तक दूसरा डोरा ना पहने कुछ भी खाना नहीं चाहिए |

जय बोलो दशमाता की जय

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