चैत्र नवरात्रि 2019: व्रत, पूजन विधि महत्त्व, घट स्थापना मुहूर्त | Navratri Pujn Vidhi Ghatasthapana Muhurat 2019

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Last updated on March 28th, 2019 at 12:48 pm

6 अप्रेल  शनिवार  2019

चैत्र प्रतिपदा युगादि तिथि हैं | अनेक ऋषियों का जन्म दिन हैं | आर्य समाज का स्थापना दिवस हैं | चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से कई भारतीय संवत्सर प्रारम्भ हो रहे हैं | सृष्टि संवत , वामन संवत , राम संवत  आदि | चैत्र नवरात्रि का प्रारम्भ शनिवार 06 अप्रेल 2019से 14 अप्रेल 2019  तक हैं | दिनांक अलग हो सकता हैं | प्रतिपदा को भारत के कुछ भागों में गुडीपडवा भी कहा जाता हैं | इस दिन प्रात: काल नीम की कोपलो के साथ गुड और काली मिर्च का सेवन किया जाता हैं जिससे वर्ष भर तक स्वास्थ्य ठीक रहता हैं |

घट – स्थापना शुभ मुहूर्त 

पंडित विष्णु पुरोहित के अनुसार : – शुभ मुहूर्त  –  06 बजकर 09 मिनट से 10 बजकर 21 मिनट तक घट स्थापना का श्रेष्ठ मुहूर्त हैं | 11  बजकर 58  मिनट से 12   बजकर 49  मिनट के बीच अभिजित   मुहूर्त हैं |  इसके  चर राशि में होने के कारण साधारण मुहूर्त रहेगा |

चैत्र शुक्ला प्रतिपदा का महत्त्व

ब्रह्मपुराण के अनुसार ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण इसी दिन सूर्योदय होने पर प्रारम्भ किया था |

सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित कर विक्रम संवत की शुरुआत की थी |

शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात नवरात्र स्थापना का पहला दिन यही हैं , प्रभु राम के जन्म दिन रामनवमी से पूर्व नौ दिन उत्सव मनाने का प्रथम दिन |

सिख परम्परा के दुसरे गुरु अंगदेव का जन्म दिवस |

वसन्त ऋतू का आरम्भ वर्ष प्रतिपदा से ही होता हैं , जों उल्लास उमंग ख़ुशी तथा चारों और पुष्पों की खुशबु फैली होती हैं |

फसल पकने का प्रारम्भ यानि किसान की मेहनत का फल मिलने का समय भी यही होता हैं |

इस दिन किसी भी कार्य को करने में मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती क्यों की ये सम्पूर्ण नौ दिन अति शुभ माने गये हैं |

माँ अम्बेजी की आरती पढने के लिए यहाँ क्लिक करे 

शारदीय नवरात्रि पूजन, घट स्थापना विधि , महत्त्व व्रत विधि पढने के लिए यहाँ क्लिक करे 

 नवरात्र स्थापना व्रत विधि , पूजन विधि

नमो  देव्यै  महामुर्त्ये  सर्वमुर्त्ये  नमो  नम: |

           शिवाये  सर्वमागंल्ये  विष्णु माये च ते नम: ||

           त्वमेव श्रद्धा बुदधिस्तवं मेधा विधा शिवंकरी  |

           शांतिर्व़ाणी त्व्मेवासी नारायणी नमो नम: ||

चैत्र और आशिवन के पवित्र महीने में भक्तिपूर्वक यह पूजा होती हैं | अमावस्या के दिन उत्तम  सामग्री एकत्रित कर लेनी चाहिए | किसी समतल भूमि पर मंडप बनवाये | ब्राह्मणों की पूजा करे , अपनी शक्ति के अनुसार वरण में वस्त्र और भूषण अर्पण करे | घर में सम्पति हो तो कंजूसी ना  करे |संतुष्ट ब्राह्मणों द्वारा ही सम्यक प्रकार से कार्य परिपूर्ण करवाए | देवी का पाठ नौ , पांच , तीन , एक ब्राह्मण से पाठ करवाने का विधान हैं |  वेदी पर रेशमी वस्त्र स्थापित करे उस पर भगवती माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करे | प्रतिपदा में हस्त नक्षत्र हो उस समय का पूजन शुभ माना जाता हैं | प्रथम नवरात्रि को उत्तम विधि से किया हुआ पूजन व्रती  की अभिलाषा पूर्ण करने वाला होता हैं | दिव्य वस्त्र , भूषण और अमृत के समान मधुर भोजन से कुमारी कन्याओं की पूजा करनी चाहिए | पहले दिन एक कन्या का पूजन करे , फिर क्रमश: एक एक बढ़ता जाए | दुसरे दिन दो , तीसरे दिन तीन इस प्रकार नवें दिन नौ कन्याओं का पूजन करना चाहिए |

सम्पूर्ण कामना पूर्ति के लिए माँ कल्याणी की निरंतर पूजा करे |

शत्रु नाश के लिए भगवती ‘ कालिका ‘ की भक्ति पूर्वक आराधना करे |

एश्वर्य व धन की पूर्ति के लिए ‘ भगवती चण्डिका ‘ की पूजा करे |

किसी को मोहित करने , दुःख – दरिद्रता को दुर करने , संग्राम में विजय पाने के लिए  ‘ भगवती शाम्भवी की सदा पूजा करनी चाहिए |

कठिन कार्य सिद्धि के लिए  ‘ भगवती दुर्गा ‘ की पूजा करनी चाहिए |

असम्भव से असम्भव कार्य भी भगवती जगदम्बा की कृपा से दुर हो जाती हैं | नवरात्र के नौ दिनों में माँ के अलग अलग रूपों की पूजा की जाती हैं – माँ शैलपुत्री , ब्रह्मचारिणी , चन्द्रघंटा , कुष्मांडा , स्कन्दमाता , कात्यायनी , कालरात्रि , महागौरी , सिद्धिदात्रि माँ के नौ अलग अलग रूप हैं | नव रात्र के पहले दिन घट स्थापना की जाती हैं | इसके बाद नौ दिन माँ का पूजन व उपवास , श्रद्धा और भक्ति से करते हैं | दसवे दिन कन्या पूजन के बाद उपवास खोला जाता हैं | माता सुख़ – समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं |

नवरात्र में रामायण पाठ का विशेष महत्व हैं | अखंड रामायण के पाठ किये जाते हैं | श्रद्धा व भक्ति से रामायण पाठ करने से माँ भगवती अत्यंत प्रसन्न हो अति शीघ्र फल प्रदान करती हैं | दुर्गा चालीसा के पाठ , दुर्गा सप्तशती के पाठ करना चाहिए |

पराशक्ति माँ भगवती श्रीदुर्गा का ध्यान कर “ दुर्गा सप्तशती “ का पाठ स्वयं करे या किसी विद्वान् पंडित से करवा सकते है ध्यान रहे कि नवरात्रि प्रारम्भ होने से लेकर समाप्ति तक माँ के समक्ष अखंड दीप जलाये रखना चाहिए |

भगवान राम का चित्र स्थापित कर रामायण { नव पारायण पाठ }किया जाता हैं प्रत्येक पाठ के पश्चात विश्राम होता है इस प्रकार रामायण के पाठ 9 दिन में पुरे होते है | इसके पश्चात कन्या पूजन कर उन्हें दक्षिणा देवे |

दुर्गा सप्तशती के सिद्ध सम्पुट मन्त्र पढने के लिए यहाँ क्लिक करे 

 

माँ का ध्यान करे

दुर्गति नाशिनी  दुर्गा जय जय , काल – विनाशिनी  काली जय जय |

उमा – रमा ब्रहमाणी  जय जय , राधा – सीता – रुक्मणी जय जय ||

साम्ब सदाशिव , साम्ब सदाशिव  ,साम्ब सदाशिव , जय शंकर |

हर हर शंकर दुःखहर   सुखकर ,अघ – तम – हर हर हर शंकर ||

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे | हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ||

जय – जय दुर्गा , जय माँ तारा | जय गणेश जय शुभ – आगारा ||

जयति  शिवा  शिव  जानकीराम  |    गोरी शंकर             सीताराम ||

जय  रघुनन्दन  जय  सियाराम   | वज्र  गोपी  प्रिय  राधेश्याम   |

रघुपति राघव राजा राम  |  पतित पावन सीताराम ||

                          || जय माता दी ||