माँ अम्बे जी की आरती

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Last updated on March 14th, 2018 at 04:33 pm

सर्व मंगल मांगलेय शिवे सर्वार्थ साधिके |

शरनेय त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते ||

माँ अम्बे जी की आरती

ॐ जय अम्बे गोरी , मैया जय श्यामा गोरी |

तुमको निश दिन ध्यावत , हरि ब्रह्मा शिवरी || टेक ||

मांग सिंदूर विराजत , टिको मृग मद को |

उज्जवल से दोउ नैना ,चन्द्र बदन नीको ||जय 0

कनक समान कलेवर , रक्ताम्बर राजे |

रक्त पुष्प गल माला , कण्ठन पर साजे || जय 0

केहरी वाहन राजत , खड्गं खप्पर धारी |

सुर नर मुनि जन सेवत , तिनके दुःखहारी || जय 0

कानन कुण्डल शोभित , नासाग्रे मोती |

कोटिक चन्द्र दिवाकर , राजत सम ज्योति || जय 0

शुम्भ निशुम्भ विडारे , महिषासुर घाती |

धुम्र विलोचन नैना , निशदिन मदमाती ||जय 0

चंड मुंड सघहारे , शोणित बीज हरे |

मधुकैटभ दोउ मारे , सुर भयहीन करे || जय 0

ब्रह्माणी रुदारिणी तुम कमला राणी ||

आगम निगम बखानी , तुम शिव पटरानी ||जय 0

चोसठ योगिनी मंगल गावत , न्रत्य करत भैरू |

बाजत ताल मृदगा , अरु बाजत डमरू || जय 0

तुम ही जग की माता , तुम ही हो भरता |

भक्तन की दुःख हरता , सुख़ – सम्पति करता || जय 0

भुजा चार अति शोभित , खड्ग खप्पर धारी |

मनवांछित फल पावत , सेवत नर नारी || जय 0

कंचन थाल विराजत , अगर कपूर बाती |

श्री मालकेतु में राजत , कोटि रतन ज्योति || जय 0

श्री अम्बे जी की आरती , जों कोई नर गावे |

कहत शिवानन्द स्वामी , सुख़ सम्पत्ति पावे ||जय 0

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