शारदीय नवरात्रि घट स्थापना विधि , मुहूर्त 2019 | Shardiya Navratri Ghat Sthapana Shubh Muhurat 2019

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Last updated on November 18th, 2019 at 06:34 pm

नमो  देव्यै  महामुर्त्ये  सर्वमुर्त्ये  नमो  नम: |

शिवाये  सर्वमागंल्ये  विष्णु माये च ते नम: ||

त्वमेव श्रद्धा बुदधिस्तवं मेधा विधा शिवंकरी  |

शांतिर्व़ाणी त्व्मेवासी नारायणी नमो नम: ||

इस वर्ष शारदीय नवरात्री का आरम्भ –  17 अक्तूबर  2020  से  24 अक्टूबर को दुर्गाष्टमी  25  अक्टूबर को रामनवमी 2020  व  26 अक्टूबर को  दसवाँ दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध हैं |

महामंत्र

 या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

 या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

 या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

 या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

 या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

 या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

 या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

 नवरात्रि घट स्थापना विधि

आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक नवरात्रि के व्रत 9  दिन तक रहते है | प्रतिपदा के दिन प्रात: स्नान आदि करके संकल्प करे | उत्तर पूर्व दिशा में  घट स्थापना करे | घट स्थापना शुभ मुहूर्त में करे | एक पाटे पर लाल व सफेद वस्त्र बिछाये | सर्व प्रथम गणेश जी का ध्यान करे |  मिट्टी में पानी डालकर गेहु या जों  बोंये | इस पर कलश स्थापित करे | कलश में हल्दी की गाठं , सुपारी , रुपया , दूर्वा  रख्रे | एक नारियल को लाल वस्त्र में बांधकर उसे कलश पर स्थापित करे  | ” माँ दुर्गा  ” की प्रतिमा स्थापित कर रोली,  मोली , अक्षत , चुनरी , सिंदूर , फूल माला , सुगन्धित  पुष्प  से विधि पूर्वक  उनका पूजन करते है |

प्रात: व संध्या काल  नित्य माँ को नवैध्य चढाये ,  परिवार सहित माँ की आरती गाये , माँ के समक्ष अखंड दीप जलाये |

महा अष्टमी के दिन माँ के समक्ष ज्योत जलाकर लापसी , चावल , हलवा पूरी का भोग लगा कर कन्या पूजन करे दक्षिणा देवे |

माँ शैल पुत्री , ब्रह्मचारिणी , चन्द्र घंटा , कुष्मांडा , स्कन्द माता , कात्यायनी , कालरात्रि , महागौरी और सिद्धि दात्री माँ के नौ अलग अलग रूप हैं |

पराशक्ति माँ भगवती श्रीदुर्गा का ध्यान कर “ दुर्गा सप्तशती “ का पाठ स्वयं करे या किसी विद्वान् पंडित से करवा सकते है ध्यान रहे कि नवरात्रि प्रारम्भ होने से लेकर समाप्ति तक माँ के समक्ष अखंड दीप जलाये रखना चाहिए |

भगवान राम का चित्र स्थापित कर रामायण { नव पारायण पाठ }किया जाता हैं प्रत्येक पाठ के पश्चात विश्राम होता है इस प्रकार रामायण के पाठ 9 दिन में पुरे होते है | इसके पश्चात कन्या पूजन कर उन्हें दक्षिणा देवे |

माँ का ध्यान करे

दुर्गति नाशिनी  दुर्गा जय जय , काल – विनाशिनी  काली जय जय |

उमा – रमा ब्रहमाणी  जय जय , राधा – सीता – रुक्मणी जय जय ||

साम्ब सदाशिव , साम्ब सदाशिव  ,साम्ब सदाशिव , जय शंकर |

हर हर शंकर दुःखहर   सुखकर ,अघ – तम – हर हर हर शंकर ||

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे | हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ||

जय – जय दुर्गा , जय माँ तारा | जय गणेश जय शुभ – आगारा ||

जयति  शिवा  शिव  जानकीराम  |    गोरी शंकर             सीताराम ||

जय  रघुनन्दन  जय  सियाराम   | वज्र  गोपी  प्रिय  राधेश्याम   |

रघुपति राघव राजा राम  |  पतित पावन सीताराम ||

|| जय माता दी ||

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