Mauni Amavasya 2022 || मौनी अमावस्या, शुभ मुहूर्त, महत्व, व्रत नियम और पौराणिक कथा2022

मौनी अमावस्या

Mauni Amavasya 2022 मौनी अमावस्या, शुभ मुहूर्त, महत्व, व्रत नियम और पौराणिक कथा 2022 

माघ माह में आने के कारण इस अमावस्या को मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता हैं | इस मोनी अमावस्या को पवित्र संगम और तीर्थ स्थानों पर स्नान करने का विशेष महत्त्व हैं | क्यों की वहा देवी देवताओ का निवास स्थान होता हैं | माघ मास में  कुम्भ स्नान का भी विशेष महत्त्व हैं | हिन्दू धर्म में कार्तिक मास के समान ही माघ मास को उत्तम माना हैं | माघ माह धार्मिक कर्मो के लिए श्रेष्ठ हैं |  पितृ तर्पण , पूजन का विशेष महत्त्व हैं | मोनी अमावस्या पितृ दोष निवारण और काल सर्प दोष के निवारण के लिए श्रेष्ठ हैं |

मौनी  अमावस्या 31 जनवरी  2022  सोमवार  को हैं | इस वर्ष मौनी अमावस्या गुरुवार  को होने के कारण अत्यधिक शुंभ हैं |

सोमवती अमावस्या

इस दिन दान पूण्य करने से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता हैं |

 महत्त्वपूर्ण हैं पितरो को धन से नहीं केवल श्रद्धा पूर्वक किये पूजन से प्रसन्न किया जाता हैं | मोनी  अमावस्या का दिन व्रत , तर्पण ,पूजन के लिए श्रेष्ठ हैं |

 मौनी अमावस्या 2021 तिथि और शुभ मुहूर्त

 11 फरवरी 2021 को 01:10:48 से अमावस्या आरम्भ।
 12फरवरी  2021 को 00:37:12 पर अमावस्या समाप्त।

सोमवती अमावस्या व्रतविधि , व्रत कथा 

मौनीअमावस्या के दिन किसी तीर्थ स्थान पर पितृ तर्पण कर ब्राह्मण भोजन करवाने से पितृ प्रसन्न होते हैं |

इस दिन “ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय “ मन्त्र का जप करने मात्र से ही पितृ प्रसन्न होते हैं |

पितृ दोष निवारण के लिए   ” ॐ पितृ देवयो नम :’ मन्त्र का जप करे |

इस दिन तामसिक वस्तुओ का सेवन कदापि नहीं करे |

इस दिन बहन , भांजी , भांजा को भोजन करवाए और दक्षिणा देने से पितरो की आत्मा को शांति प्राप्त होती हैं तथा पितृ दोष निवारण हो जाता हैं |

पितृ तर्पण से बढकर और कोई कल्याणकारी कार्य नहीं हैं और वंश वृद्धि के लिए पितरो की आराधना की एकमात्र उपाय हैं |

इस दिन पितृ पूजन करने व्रत करने गृह क्लेश का नाश हो परिवार में सुख शांति , वंश वृद्धि , अन्न धन के भंडार सदैव भरे रहते हैं |

पराई निंदा , चोरी , झूठ बोलना , तामसिक भोजन , नशा आदि कृत्य इस दिन सर्वथा वर्जित हैं |

मन ही मन इस दिन “ ॐ पितृ देवाय नम: “ इस मन्त्र का जप करे किसी द्वार पर आये याचक को भूखा नहीं जाने दे |

मौनी अमावस्या की पौराणिक कथा 

एक साहूकार था | उसके सात बेटे बहु व एक बेटी थी | उसके घर एक जोगी भिक्षा लेने आता जब बहुए भिक्षा देती तो वह ले लेता और जब बेटी देती तो जोगी भिक्षा नही लेता और बोलता “ बेटी सुहागन तो हैं , पर इसके भाग्य में दुःख लिखा हैं |” ऐसा सुनकर बेटी दुबली होने लगी तो बेटी की माँ ने बेटी से पूछा , तू क्यों सुख़ रही हैं ? बेटी की माँ ने जोगी वाली बात बताई | दुसरे दिन माँ ने छुपकर जोगी की बात सुन ली और जोगी के पावं पकड़ लिए और कहा की आप ही कुछ इसका उपाय बता सकते हैं की इसके भाग्य में क्या लिखा हैं , इसका उपाय बताओं | जोगी ने कहा की सात समुन्द्र पार एक सीमा धोबन रहती हैं | वह अमावस्या का व्रत करती हैं यदि वह इसका फल इसको दे दे तो इसके भाग्य में लिखे दुःख टल जायेगे | उसकी माँ सीमा धोबन की तलाश में सात समुन्द्र पार सीमा धोबन को ढूढने चली गई |रास्ते में पीपल के पेड़ के नीचे विश्राम करने लगी तो देखा एक सापं गरुड पक्षी के बच्चो को खा जायेगा तो उसने गरुड पक्षी को मर दिया | इतने में गरुड पक्षी का जौड़ा उड़ता उड़ता आकाश से आया और चोच मरने लगा तो वो बोली “ मैने तो तेरे बच्चो को बचाया हैं , तेरा गुनहगार मरा पड़ा हैं |” गरुड बोला जों मांगना हैं मांग सो मांग | लडकी की माँ बोली मुझे सात समुन्द्र पार पहुचा दो | गरुड ने उसे सीमा धोबन के घर के पास उसको छोड़ दिया |वहाँ सीमा धोबन के सात बहु व बेटे थे | बहुए काम करते हुए लडती थी | सीमा धोबन को खुश करने के लिए सारा काम सबके उठने से पहले कर देती | सब सोचने लगे की यह काम कौन करता हैं | सीमा धोबन ने सोचा सारा काम कोनसी बहु करती हैं देखना चाहिए | “  चुपचाप आँख बंद करके सो गई तो देखा एक ओरत आई और सारा काम करके जाने लगी |सीमा धोबन ने उसको रोक कर पूछा – तू किस स्वार्थ से हमारे घर का काम करती हैं | साहुकारनी  बोली – मेरी बेटी को आप अपना  अमावस्या का पुण्य दे दे और सारी बात बताई | धोबन तैयार हो गई | अपने घर वालो को बोल दिया की मेरे आने तक किसी को भी घर के बाहर न जाने देना| साहुकारनी के साथ सीमा धोबन उसके घर आ गई | बेटी के ब्याह की तैयारी करी | दूल्हा दुल्हन फेरे में बैठे | दूल्हा के पास सीमा धोबन , मिट्टी की हांड़ी कच्चा दूध , कच्चा सूत लेकर बैठी | इतने में दुल्हे को डसने के लिए साँप आया | धोबन ने उसे हांड़ी में डाला और कच्चे सूत से हांड़ी बांध दी तो साँप बोला दूल्हा तो डर के मारे मर गया | तू उसे जीवन दान दे | सीमा धोबन ने उसके ऊपर छीटे दिए और कहा आज तक जितनी अमावस्या करी उसका पुण्य साहूकार की बेटी को लगना और जों अमावस्या करूं उसका पुण्य साहूकार की बेटी को लगना और आगे जों अमावस्या करूं उसका फल मेरे पति को लगना | इतना बोलते ही दूल्हा उठ गया | काम पूरा हुआ , वो अपने घर जाने लगी तो साहुकारनी बोली  मैं आपको क्या दू तब सीमा धोबन बोली मुझे क्या चाहिए , बस  एक मिट्टी की हांड़ी दे दे | रास्ते में अमावस्या आई | उसने हांड़ी के 108 टुकड़े कर पीपल के नीचे रखे | 13 टुकड़े एक जगह रखे व पीपल के 108 परिक्रमा दी और टुकड़े पीपल में गाड़ दिये , घर जाने लगी | घर आई तो उसका पति मरा पड़ा था | उसने पति पर सुहाग का छीटा दिया और कहा मेरी अमावस्या का फल मेरे पति को मिले | ऐसा कहते ही उसका पति जीवित हो गया | एक ब्राह्मण आया और बोला अमावस्या का जों किया हो वो दान दो |

सीमा धोबन बोली रास्ते में अमावस्या आई कुछ नही कर पाई और जों किया वो पीपल के नीचे गाड़ दिया | ब्राह्मण ने जगह खोदी तो पाया की वहाँ 108 व 13 सोने के टुकड़े रखे हैं | इकट्टे करके वो घर आया , और धोबन से बोला इतना धर्म किया और कहती कुछ न किया | सीमा धोबन बोली ये सब तुम्हारे भाग का हैं आप ले आवो | ब्राह्मण बोला मेरा तो चौथा हिस्सा ही हैं | बाकि तिन हिस्सा आप की इच्छा हो उसको देना | ब्राह्मण ने नगर में ढिढोरा पिटा दिया , सब जन अमावस्या का व्रत करे | हे अमावस्या साहूकार की बेटी को दिया वैसा अमर सुहाग सबको देना |

|| जय बोलो मौनी अमावस्या की जय ||                         ||ॐ पितृ देव्य नम: ||

teg – मौनी अमावस्या 

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धार्मिक कलेण्डर 2019 

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सोमवती अमावस्या व्रत कथा , पूजन विधि 

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