बुधवार व्रत की कथा , विधि , महत्त्व

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Last updated on December 13th, 2017 at 03:29 pm

बुधवार  व्रत का महत्त्व

भगवान गणेश को प्रसन्न करने का मार्ग बड़ा ही सरल और सुगम हैं | उसे प्रत्येक अमिर गरीब व्यक्ति कर सकता हैं | उसमे न विशेष खर्च की ,न दान पुण्य की , न विशेष योग्यता की और न विशेष समय की ही आवश्यकता हैं , आवश्यकता हैं केवल शुद्ध भाव की |

पिली मिट्टी की डली ले लो , उस पर लाल कलावा [ मोली ] लपेट दो ,बस भगवान गणेश साकार – रूप में उपस्थित हो गये | रोली का छीटा लगा दो और चार बताशे चढ़ा कर भोग लगा दो और इस मन्त्र से  हाथ जौडकर गणेशजी की आराधना करें  ———

गजाननम                  भूतगणादिसेवितं

कपित्थजम्बूफलचारूभक्षणम  |

उमासुतं               शोकविनाशकारकं

नमामि        विघ्नेस्र्चपादपकंजम ||

इतने मात्र से ही भगवान गणेश प्रसन्न हो जायेगे | क्यों की वे द्यामुर्ति हैं | दूब व गुड प्रत्येक बुधवार को या प्रतिदिन गणेश जी को चढाने मात्र से ही गणेश जी की कृपा से सारी मनोकामनाए पूरी हो जाती  हैं |

बुधवार व्रत की विधि

व्रत करने की इच्छा वाले स्त्री या पुरुष को बुधवार को प्रात: उठकर नित्यकर्म सम्पन्न कर पवित्र जल से स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करे तथा गंध , पुष्प ,दीप , कपूर , कुंकुम एव विभिन्न नैवैद्ध से भक्तिपूर्वक भक्तो पर वात्सल्य भाव रखने वाले भगवान गजानन्द की भक्तिपूर्वक पूजा करनी चाहिए | भगवान गणेश को मोदक अति प्रिय हैं | हरा रंग भी अति प्रिय हैं ,अत; आप हरे वस्त्र पहने |  कम से कम सात बुधवार तक यह व्रत करना चाहिए | दिन में एक ही समय भोजन करे | पूजा के पश्चात कहानी सुने व आनन्द से आरती गाये व भक्त जनों ने प्रसाद वितरण करे | आप स्वयं प्रसाद ग्रहण करे व भोजन करे |

                       बुधवार व्रत की कथा

एक व्यक्ति अपनी पत्नी को विदा करवाने अपने ससुराल गया |कुछ दिवस रहने के पश्चात उसने सास – ससुर को अपनी पत्नी को विदा करने को कहा | किन्तु सास ससुर ने बड़े विनीत भाव से कहा आज बुधवार का दिन हैं | आज के दिन गमन नहीं करते | उस व्यक्ति ने किसी की नहीं मानी और जरूरी कार्य होने की बात कहकर उसी दिन अपनी पत्नी की विदा कराकर अपने नगर की तरफ चल पड़ा |

रास्ते में उसकी पत्नी को प्यास लगी तो उसने अपने पति से कहा मुझे प्यास लगी पति लोटा लेकर गाड़ी से उतरकर जल लेने चला गया | जब वह जल लेकर लौटा और अपनी पत्नी के निकट आया तो उसने देखा की उसका हमशक्ल उसकी पत्नी के निकट बैठा हैं | उसने क्रोध में पूछा तुम कौन हो ? तुम मेरी पत्नी के निकट क्यों बैठे हो | दोनों में झगड़ा हो गया दुर खड़े राजा के सैनिको आये और उसके असली पति को पकड़ लिया और पत्नी को पूछा तुम्हारा पति कौनसा हैं | पर पत्नी को कुछ समझ नहीं आया पत्नी शांत रही | वह व्यक्ति मन ही मन भगवान से प्रार्थना करने लगा | हे ! परमेश्वर यह क्या लीला हैं सच्चा झूठा बन रहा हैं | मुझसे कुछ भूल हुई तो क्षमा करे | तभी आकाशवाणी हुई की मुर्ख आज बुधवार के दिन तुझे गमन नहीं करना था | तूने किसी की बात नहीं मानी | यह लीला भगवान बुद्धदेव की हैं | उस व्यक्ति ने भगवान बुद्धदेव से क्षमा – याचना की | तब मनुष्य रूप में आये भगवान बुद्धदेव अंतर्ध्यान हो गये | पति प्रसन्नता पूर्वक अपनी पत्नी को लेकर अपने घर चला आया |

दोनों पति – पत्नी नियम पूर्वक बुधवार का व्रत करने लगे | जों व्यक्ति नियम पूर्वक बुधवार की कथा पढ़ता , सुनता हैं उसको बुधवार के दिन यात्रा करने का दौष नही लगता | तथा जों जिस मनोकामना से व्रत करता हैं भगवान गणेश उसकी सभी मनोकामनाए पूरी करते हैं |

|| जय बुद्धदेव भगवान की जय ||
                                                ||  जय गणेशजी भगवान की जय ||