गाज माता व्रत पूजन विधि , गाज माता की कहानी , व्रत का महत्त्व Gaaj Mata Vrat Pujan Vidhi , Gaaj Mata Ki Kahani

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Last updated on August 31st, 2019 at 08:55 pm

गाज माता व्रत पूजन विधि , गाज माता की कहानी , व्रत का महत्त्व

Gaaj Mata Vrat Pujan Vidhi , Gaaj Mata Ki Kahani

 

गाज माता व्रत का महत्त्व

गाज माता का व्रत भाद्रपद मास में किसी भी शुभ दिन किया जा सकता हैं अथवा भाद्रपद शुक्ला दिवतीया तिथि को करना शुभ माना जाता हैं | इस वर्ष गाज माता का व्रत 2 सितम्बर 2019 सोमवार को हैं | गाज माता का व्रत करने से अन्न , धन , सन्तान , सुख की प्राप्ति होती हैं |

 

गाज माता व्रत पूजन विधि

गाज माता का पूजन भाद्रपद मास की दिव्तिया [ दूज ]  तिथि को या कोई भी शुभ दिन देखकर किया जाता हैं | इस दिन कुल देवता का पूजन किया जाता हैं | पूजन कर कुलदेवता को भोग लगाया जाता हैं | प्रसाद परिवार जनों में बाँट देते हैं | दीवार पर गाज माता [ गाज बीज ] का चित्र बनाते हैं यह चित्र घर की बड़ी पुत्रवधू बनाती हैं |

चित्र में भील भीलनी के साथ एक लडके का चित्र बनाते हैं | भील भीलनी के सिर पर टोकरीयाँ रखनी चाहिए |

एक जल का कलश गेहू हाथ में लेकर गाज माता की कहानी सुन कर जल का कलश हाथ में लेकर सूर्य भगवान को अर्ध्य देना चाहिए |

 गाज माता की कहानी

 Gaaj Mata Ki Kahani

एक राजा और रानी थे | वे निसंतान थे | रानी ने गाज माता से मन्नत मांगी की यदि मेरे सन्तान हो जायेगी तो मैं हलवा पुड़ी का भोग लगाउंगी | नवे महीने रानी ने एक पुत्र को जन्म दिया परन्तु रानी गाज माता के हलवा पुड़ी का भोग लगाना भूल गई | बहुत समय हो गया पर रानी ने भोग नहीं लगाया तब गाज माता ने सोचा की रानी तो मुझे भूल गई | एक दिन रानी का बेटा पालने में सो रहा था तभी गरजते हुए गाज आई और लडके को पालने सहित उड़ा कर एक निसंतान भील भीलनी के घर के घर ले गई |

जब भील भीलनी जंगल से घर आये तो देखा उनके आँगन में पालने में लड़का सो रहा था | भील भीलनी अत्यंत प्रसन्न हुए और लडके का पालन पोषण स्नेह से करने लगे | उस राज्य में एक धोबी था जो राजा और धोबी दोनों के कपड़े धोता था | जब वह राजा के घर आया तो देखा कि वहां पर सैनिक इधर – उधर दोड रहे थे | धोबी के पूछने पर सैनिक ने बताया की राजकुमार को गाज माता उठाकर ले गई | तब धोबी ने कहा मुझे राजा जी के पास लेकर चलो | धोबी ने राजाजी को बतलाया की एक भील के घर पर उडकर एक बालक आया हैं | राजा ने भील को बुलवाया और पूछा ये बालक कहा से आया तब धोबी ने कहा मेरी पत्नी गाज  माता का व्रत करती हैं गाज माता ने प्रसन्न हो हमें यह पुत्र दिया | तब

रानी को याद आया की मैंने गाज माता के हलवे पुड़ी की प्रसादी बोली थी जो करना भूल गई | रानी ने विधिवत गाज माता का व्रत करने व दुगुना हलवा पुड़ी चढ़ाने का संकल्प लिया और कहा हे गाज माता ! यदि मेरा बेटा वापिस आ जायेगा तो मैं करूंगी | गाज माता ने प्रसन्न हो उसको उसका लड़का लौटा दिया तथा भील भीलनी को पुत्र दिया | राजा ने प्रसन्न हो भील भीलनी को बहुत सारी धन सम्पति दे दी | रानी ने गाज माता का व्रत उद्यापन कर हलवा पुड़ी का भो ग लगाया |

सारी नगरी में ढिंढोरा पिटवा दिया की सब कोई गाज माता का व्रत करना | हे गाज माता जैसे राजा रानी भील भीलनी पर प्रसन्न हुई वैसे सब पर होना | सभी के कार्य सिद्ध करना |

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