श्रावण सोमवार व्रत का महत्त्व , व्रत पूजन विधि Sawan Somvar Vrat Ka Mahattv , Vrat Pujan Vidhi

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श्रावण सोमवार व्रत का महत्त्व , व्रत पूजन विधि   

   मैं सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाले श्रावण सोमवार व्रत का वर्णन करती हूँ | सभी व्रतो में श्रेष्ट यह  व्रत हैं | इस व्रत को करने से विवाह योग्य कन्या को उत्तम वर , उत्तम गुण , रूप सौन्दर्य तथा स्त्रियों को अनेक गुण वाली सन्तान , सुवर्ण , वस्त्र ,और अखंड सौभाग्य ,विद्याथीयो को  की प्राप्ति होती हैं | तथा पति पत्नी का कभी वियोग नहीं होता तथा अंत में शिव लोक में निवास करते हैं | यह व्रत एश्वर्य को प्रदान करने वाला हैं | जिस घर के स्त्री पुरुष श्रावण सोमवार व्रत को करते हैं उस घर मे भगवान शंकर तथा माँ पार्वती की कृपा रहती हैं |

 

श्रावण सोमवार व्रत पूजन विधि

श्रावण सोमवार के दिन प्रात: स्नानादि से निर्वत हो , पंच गव्य तथा चन्दन मिश्रित जल से गौरी और भगवान शिव , और शिव परिवार को स्नान कराकर ,धुप ,दीप ,नैवैध्य तथा नाना प्रकार के पुष्प और फलों के द्वारा उनकी पूजा करे | इसके बाद अंग पूजा करे —-

ॐ पाटलाये नम: , ॐ शम्भवे नम; , ऐसा कहकर पार्वती और शम्भु के चरणों की , त्रियुगाये  नम: , ॐ शिवाय नम: , से दोनों गुल्फों की , विजयाये नम: , ॐ भद्रेस्र्व्राय नम; , से दोनों जानुओ की , ॐ ईशान्ये नम:  , ॐ हरिकेशाय नम: , से कटी प्रदेश की , ॐ कोटव्ये नम: , ॐ शूलिने नम: , से कुक्षियों की , ॐ मंगलाय नम: , ॐ शिवाय नम: , से उदर की , ॐ उमायै नम: , ॐ रुद्राय नम: , से कुचद्वय की , ॐ अनन्ताये नम: , ॐ त्रिपुरघनाय नम: , से दोनों हाथो की पूजा करे |ॐ भवान्यै नम: , से दोनों के कण्ठ की , ॐ गौर्यै नम: , ॐ हराय नम: , से दोनों के मुख की तथा ॐ ललिताय नम: , ॐ सर्वात्मने नम: से दोनों के मस्तक की पूजा करे | दिन में एक समय भोजन करे |

श्रावण सोमवार को अंग पूजा करने से सभी मनोकामनाए पूर्ण होती हैं तथा चमत्कारी प्रभाव मिलते हैं |

भगवान शिव व माँ गौरी की पूरी श्रद्धा भक्ति से की गई पूजा अधिक फलदाई होती हैं मन ही मन भगवान भोलेनाथ का ध्यान करना चाहिए तथा किसी भी प्रकार के निंदनीय कार्य से बचना चाहिए और श्रावण सोमवार के व्रत में किसी की निन्दा [ बुराई ] नहीं करना चाहिए |

श्रावण मास में भगवान शिव की लिंग रूप में पूजा की जाती हैं |भगवान शिव परात्पर ब्रह्म हैं | उनका देव स्वरूप सभी के लिए वन्दनीय हैं | शिव पुराण के अनुसार सभी प्राणियों के कल्याण के लिये भगवान शंकर लिंगरूप में विविध तीर्थों में निवास करते हैं | पृथ्वी पर वर्तमान शिवलिंगो कि संख्या असंख्य हैं |परन्तु इन सभी में द्वादश ज्योतिर्लिंगों की की प्रधानता हैं |शिवपुराण में इन ज्योतिर्लिंगों स्थान निर्देश के साथ – साथ कहा गया हैं की जों इन बारह नामों का प्रातकाल उठकर पाठ करता हैं उसके सात जन्मों के पापों का विनाश हो जाता हैं तथा इस जन्म में सम्पूर्ण सुख़ प्राप्त होते हैं

|सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम |

उज्जयिन्या महाकालमोकारं परमेश्वरम ||

केदारं हिमवत्पृष्ठे डाकिन्यां भीमशंकरम |

वाराणस्या च विश्वेशं त्र्यम्बकम गौमतीतटे ||

वैध्यनाथम चिताभुमौ नागेशं दारुकावने |

सेतुबंधे च रामेशं घुश्मेश च शिवालये ||

द्वादशैतानी नामानी प्रातरुत्थाय य: पठेत |

सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेंन विनश्यति |

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