भगवान शिव का अर्द्धनारीश्वर अवतार एवं सती के जन्म की कथा |Bhagwan Shiv Ka Ardhnarishwar Avatar Ki Katha And Sati janm Ki Katha

By | July 24, 2020

भगवान शिव को  अर्द्धनारीश्वर अवतार क्यों लेना पड़ा | आज हम आपको इसके पीछे जुडी  पौराणिक कथा के बारे में बताने जा रहे हैं | भगवान शिव ने अनेक रूप धारण किए हैं, उनकी अनेकों रूप में पूजा की जाती है उन्ही में से एक अवतार है अर्द्धनारीश्वर अवतार जिसका अर्थ है — आधा भाग स्त्री का और आधा नर रूप में भगवान शिव अपनी  अर्धांगिनी शिवा के साथ अपने भक्तों को दर्शन देते हैं ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव और शक्ति ने एक साथ मिलकर इस संसार की उत्पत्ति केलिए ब्रह्माजी को वरदान दिया | पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान ने परमपिता ब्रह्मा जी की कठोर आराधना से प्रसन्न होकर  धारण किया था |

भगवान शिव का अर्द्धनारीश्वर अवतार एवं सती के जन्म की कथा

Bhagwan Shiv Ka Ardhnarishwar Avatar Ki Katha Aur  Sati janm Ki Katha

ब्रह्मा जी ने सृष्टि की उत्पत्ति करने का विचार मन में ग्रहण कर भगवान शिव कीअर्द्धनारीश्वर रूप परम शक्तिरूप  से दोनों का संयुक्त रुप से शिव को हृदय में ध्यान कर मग्न होकर तपस्या करने लगे | भगवान  ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या को देख कर देवादिदेव भगवान शिव अर्द्धनारीश्वर रूप  से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी के समक्ष प्रस्तुत हुए |  ब्रह्मा जी ने दोनों हाथ जोड़कर नतमस्तक होकर भगवान शिव की स्तुति करने लगे | और अत्यंत मधुर वाणी में ब्रह्मा जी से कहा मैं तुम्हारी समस्त मनोकामनाएं को पूर्ण रूप से जान गया हूं  |प्रजा की उत्पति  के लिए तुम्हें तुमने इस समय मेरे अर्द्धनारीश्वर रूप  तपस्या की है उस तपस्या से मैं प्रसन्न हूं और तुम्हें मनवांछित वरदान दे रहा हूं  | परम दयालु कृपा निधान भगवान शिव के यह मधुर वचन सुनकर देवादिदेव भगवान  शिव ने अपने वाम भाग से देवी पार्वती को प्रगट  कर ब्रह्मा जी के समक्ष प्रस्तुत कर दिया | माँ पार्वती की शोभा अपरम्पार थी | उनका रूप मनमोहक था | शिव से अलग हुई परम शक्ति माँ भगवती  को देखकर ब्रह्माजी प्रसन्नचित अश्रुपूरित आंखोंमाँ भगवती की प्रार्थना करने लगे | हे माते !  देवाधिदेव शिव अत्यंत दयालु कृपा निधान दया के सागर है भगवान भोले नाथ ने ही मुझे उत्पन्न किया है और उन्हीं परमात्मा शिव ने इस संसार की रचना का कार्यभार दिया हैं |

हे माते ! मैंने [ब्रह्माजी ] अपने मन से सभी देवताओं तथा सृष्टि की उत्पत्ति करने की का बार-बार प्रयास किया है परंतु मैं उस में असमर्थ रहा क्योंकि मैं मैथुनी सृष्टि से ही अपने समस्त प्रजा की उत्पति  करना चाहता हूं आप की उत्पत्ति से पहले मैंने देवाधिदेव शिव के शरीर से स्त्री की उत्पत्ति नहीं हुई है इसीलिए मैं उस स्त्री कुल की रचना करने में असमर्थ रहा हूं सभी शक्तियां आप से ही उत्पन्न होती है यह संपूर्ण संसार आपकी ही रचना से फलीभूत हो सकता है आप ही देवी सभी का कल्याण करें |

हे माते ! इस चराचर जगत की उत्पत्ति करने के लिए स्त्री जाति की रचना करने के लिए मुझ में सामर्थ्य प्रदान कीजिए हे शिव प्रिये !  मुझे वरदान दीजिये | अपनी कृपा मुझ पर कीजिए मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूं  |हे  देवी ! मैं आपसे एक वर और माँगता हूँ आप कृपा कर मेरी मनोकामना पूर्ण करे | ह जगत  जननी माता में आपको प्रणाम करता हूं | हे देवी ! हे माँ ! इस संसार की उत्पत्ति के लिए आप अपने एक रूप में मेरे पुत्र दक्ष की कन्या पुत्री रूप में जन्म लेकर मेरी सभी कामनाओं की पूर्ति करने की कृपा करें |

तब मां पार्वती ने ब्रह्मा जी को तथास्तु कहकर उनकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए राजा दक्ष के घर में जन्म लेने का वर दिया | तब ब्रह्मा जी अपनी मनोकामना के पूरी होने पर बहुत प्रसन्न हुए औरइस सृष्टि  की रचना करने लगे |  इस प्रकार मैंने आपसे शिवजी के अत्यंत उत्तम मनोहर तथा भक्तों को परम मंगलमय प्रदान करने वाले इस अर्धनारीश्वरअवतार के बारे में बताया है  | जो भक्त इस  अर्धनारीश्वर अवतार  रूप को पढता है या सुनता है तो वह इस संसार में समस्त सुख भोग कर अंत में भगवान शिव के चरणों में स्थान प्राप्त करता है |

 ||ॐ नम: शिवाय ||

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