परिणय सूत्र बन्धन

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विवाह संस्कार जीवन का श्रेष्टतम संस्कार हैं | जीवन भर के लिये और सात जन्मो के लिये | इसका उद्देश्य इतना महान और पवित्र हैं कि संसार के इतिहास में और इसकी तुलना का कोई उदाहरण नहीं मिलता | इसका एकमात्र उद्देश्य यह हैं कि दोनों पति – पत्नी मिलकर उन्नति के पथ पर अग्रसर हों और दोनों की आत्मायें इस प्रकार एक हों जायें जिस प्रकार जल में जल मिलकर एक होता हैं | उस समय किसी में सामर्थ्य नहीं जों भेद करके उसे विलग कर सके | पत्नी भी पति के अस्तित्व में अपने अस्तित्व को इसी प्रकार एकाकार कर दती हैं , कि दोनों को चेष्टा करने पर भी अलग – अलग नहीं किया जा सकता | राम के साथ सीता , शिव के साथ पार्वती  , का नाम जिस प्रकार एकाकार हो गए हैं |

परमात्मा जों जोडिया बनाते हैं उन्हें साकार रूप देंने भारतीय संस्कृती और संस्कारो से वैदिक मन्त्रोच्चार से जों पवित्र गटबंध होता हैं वह विवाह है | भारतीय समाज में सगाई से विवाह तक के प्रमुख रीति – रिवाज ……………….|