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कथाये

षोडस मातृकाएं । “Sixteen Matrikas”

 

 

षोडस मातृकाएं

भगवान गणपति जी की पूजा के साथ षोडस मातृकाओ का भी पुजन किया जाता है। इससे कार्य सिद्धि और उन्नति और विकास की प्राप्ति होती है यह षोडस मातृकाएं इस प्रकार है ।

माता गौरी

दिव्या स्वरूपम और गोरवरण  होने के कारण माता पार्वती को गोरी कहा गया है यह नारायणी पूर्ण ब्रह्म स्वरूपणी ने नाम से भी संसार में जानी जाती है। यश मांगलिक कार्य सुख धन वैभव आदि प्रदान करती है और शरण में आए हुए को मातृत्व सुख प्रदान करती है। जय मां भगवती देवी देव महादेव की अर्धांगिनी है यह सदा शक्ति संपन्न बनाए रखती है। यह मां भगवती दुख शोक क्लेश का नाश करती है । मां गौरी के 108 नाम में गोरी नाम प्रमुख है।

मत्स्य पुराण के अनुसार यदि मां पार्वती के 108 नाम की नामावली लिखकर मंदिर में पवित्र स्थान पर रखकर पूजन करने से शोक दुःख शौक क्लेश और दुर्गति वहां कभी प्रवेश भी नहीं कर पाती है । मां गौरी और गणेश जी का पूजन किये बिना कोई कार्य सफल नहीं होता है। सौभाग्यवती स्त्रियों को सदैव मां गौरी की प्रतिदिन पूजा करनी चाहिए ।

माता पद्मा

महादेवी भगवती लक्ष्मी का दूसरा नाम पद्मा भी है । श्री सूक्त में भी माता लक्ष्मी के नाम में पदमा नाम का व्याख्यान है। महालक्ष्मी और पदम अर्थात कमल से बहुत ही घनिष्ट संबंध है यह सुगंधित कमल की माला पहनती है इसी को हाथ में रखती है और इसी पर निवास भी करना इनको अधिक प्रिय है इनका वर्ण भी पद्म का सा है क्योंकि यह श्रम पदम से ही उत्पन्न हुई है पदम की पंखुड़ियां की भांति उनकी बड़ी-बड़ी आंखें हैं । यह समुद्र मंथन के समय ही उत्पन्न हुई थी भगवान विष्णु की परंपरिया है माता पदमा। जो भक्त माता पद्मा का पूजन करते हैं उन्हें ऐश्वर्या और धन संपत्ति यूं ही प्राप्त हो जाती है।

माता शची

अर्थात इंद्राणी। वेदों की ऋचाओं में माता शची का गुणगान मिलता है। यह षोडस शक्तियों में से एक परम शक्ति मानी गई है। सच्ची देवी इंद्र को अत्यधिक प्रिय है जब इंद्र की सभा होती है तो सच्ची इंद्र के साथ सिंहासन पर विराजती है।। यह पतिव्रताओं में श्रेष्ठ और स्त्री जाति में विशेष है। एक कथा के अनुसार एक बार इनके सतीत्व संकट की घड़ी आ गई थी राजा इंद्र की अनुपस्थिति में राजा नहुष को उसको इंद्र के पद पर प्रतिष्ठित किया गया राजा नहुष धर्म के पद पर चलने वाले योग्य शासक थे किंतु इंद्र जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए भी अपने को योग्य नहीं समझते थे परंतु जब देवताओं ने इन्हें अपना अपना तेज प्रदान कर समर्थ बनाया और वह और एक वरदान भी दिया कि जिसको तुम देख लोग उसकी शक्ति तुम में आ जाएगी यह वरदान बहुत ही महत्वपूर्ण था अब देव दानव  राजन उसके सामने नहीं आ सकते थे। ऐश्वर्या और इंद्र का सुख भोगते भोंगते राजा ना उसके द्रष्टि भ्रमित हो गई और उन्होंने देवी शची पर बुरी दृष्टि डाली और उन्हें स्वर्ग से निलंबित होना पड़ा और सर्प योनि में जन्म लेना पड़ा

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