बैशाख के पवित्र माह में स्नान व्रत कथा | Baishakh Sanan Vrt katha Baishakh Sanan Vrt katha

By | September 15, 2020

बैशाख मास स्नान व्रत कथा

एक दम्पति थे | लकडियाँ बेचकर अपना जीवन यापन करते थे | उनकी धर्म कर्म में बहुत रूचि थी | बैशाख का महिना आया तो उसकी पत्नी बैशाख स्नान करने लगी | पति प्रतिदिन लकड़ी का गठर बनाकर बेचने जाता तो उसकी पत्नी एक लकड़ी निकाल लेती | प्रात काल बैशाख स्नान कर आंवला , पीपल सिच कर विधि विधान से भगवान जनार्दन का पूजन करते करते महिना हो गया | पत्नी स्नान ध्यान से निर्वत हो बचाई हुई लकडियो का गठर बनाकर बेचने गई | भगवान जनार्दन की कृपा व उसकी सच्ची निष्ठां से लकडिया चन्दन की बन गई | राजमहल से होकर जाने लगी तो वहाँ के राजा को चन्दन की सुगंध आई राजा ने उसे बुलाया और लकडियो की कीमत पूछी – तो उसने कहाँ जितना आपको उचित लगे दे दे | मैंने बैशाख स्नान किया हैं मुझे ब्राह्मण जिमाने हैं | ब्राह्मणों को जिमाने व दक्षिणा देने जितने धन की आवश्यकता हैं |Baishakh Sanan Vrt katha

 

राजा ने उसकी सच्ची श्रद्धा देखकर पांच ब्राह्मणों को जिमाने जितना सामान व दक्षिणा उसके घर भिजवा दी , उसने ब्राह्मण जिमाये , ब्राह्मणों ने आशीर्वाद दिया और भगवान की कृपा से उसका घर महल बन गया | रसोई में 56 भोग तैयार हो गये | पति जब लकडिया बेचकर आया तो उसे झोपडी दिखी नहीं | आस पडौस वालो से पूछा तो उन्होंने बताया की तुम्हारी पत्नी की श्रद्धा व भक्ति से प्रसन्न हो झोपडी महल बन गई |

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पति की आवाज सुन पत्नी बाहर आई | पति को क्रोध आया उसने पूछा तूने चोरी की या ढाका डाला तब पत्नी ने अपने पति को बताया की मैंने बैशाख स्नान किया और रोज एक लकड़ी निकाल लेती थी जब मैं लकडिया बेचने गई तो लकडिया चन्दन की बन गई |यहाँ के राजा ने लकडिया लेकर पांच ब्राह्मणों को जिमाने की सामग्री दी | जब ब्राह्मण जीम कर जाने लगे तो उनके आशीर्वाद से झोपडी महल बन गई अन्न धन के भंडार भर गये |

पति पत्नी ने प्रेम सहित भगवान को शीश नवाया | दोनों दान पुण्य कर अतिथि सेवा में अपना जीवन बिताने लगे |

हे भगवान ! अपनी कृपा दृष्टि हम सब पर बनाये रखना जैसे उन पति पत्नी पर कृपा करी वैसे सब पर करना |

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|| जय बोलो विष्णु भगवान की जय ||

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