कामिका एकादशी व्रत [ श्रावण मास कृष्ण पक्ष ] का माहात्म्य |Kamika Ekadashi Vrat [ Sravan Maas Krishn Paksh ] Ka Mahatamy

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Last updated on August 27th, 2018 at 12:27 pm

Kamika Ekadashi Vrat [ Sravan Maas Krishn Paksh ] Ka Mahatamy

कामिका एकादशी व्रत [ श्रावण मास कृष्ण पक्ष  ] का माहात्म्य

युधिष्ठर ने पूछा – हे मधुसुदन ! गोविन्द ! आपको नमस्कार हैं | श्रावण कृष्ण पक्ष की कौनसी एकादशी होती हैं ? उसका वर्णन कीजिये | भगवान वासुदेव बोले –राजन ! सुनो , मैं तुम्हे एक पापनाशक उपाख्यान सुनाता हूँ , जिसे पूर्वकाल में ब्रह्माजी ने नारदजी को सुनाया था | नारद जी ने प्रश्न किया – भगवन ! कमलासन ! में आपसे यह सुनना चाहता हूँ कि श्रावण के कृष्ण पक्ष की जो एकादशी होती हैं , उसका क्या नाम हैं , उसके कौन से देवता हैं तथा पूण्य की प्राप्ति कैसे होती हैं ?

प्रभो ! यह सब बतलाइये |

ब्रह्माजी ने कहा – हे मुनि श्रेष्ठ ! सुनो – मैं सम्पूर्ण लोको के हित की इच्छा से तुम्हारे प्रश्न का उत्तर दे रहा हूँ | श्रावण मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘ कामिका एकादशी ‘ के नाम से जानते हैं | इस व्रत को करने से वाजपेय यज्ञ के समान फल मिलता हैं | ‘ कामिका एकादशी ‘ के दिन श्री धर , श्री हरी , श्री विष्णु , मधुसुधन , माधव आदि नामो से भगवान का पूजन करना चाहिए | भगवान श्री कृष्ण के पूजन से जो फल मिलता हैं | उसे सुनो | जो फल गंगा काशी नेमिषारणय और पुष्कर स्नान से नही होता वही फल भगवान जनार्दन के पूजन से होता हैं |जो फल सूर्यग्रहण में केदार क्षेत्र और कुरुक्षेत्र में स्नान दान करने से नहीं होता वही फल श्री हरी के पूजन से मिलता हैं | जो समुन्द्र और वन सहित समूची पृथ्वी का दान करता हैं वे दोनों समान फल के भागी माने गये हैं | जो दुग्ध देने वाली गाय बछड़े के साथ दान करता हैं वही फल की प्राप्ति कामिका एकादशी व्रत को करने से मिलता हैं | जो नर  श्रावण मास में श्री धर का पूजन करता हैं , उसके साथ गन्धर्वो और नागो सहित समस्त देवताओं  का पूजन करता हैं उसे  देवता , गन्धर्व , उरग ,पन्नग सबके पूजन का फल मिल जाता हैं | इसलिए कामिका एकादशी के दिन विधि पूर्वक श्री हरि का यत्न से पूजन करना चाहिए |

जो पाप से डरे हुए हैं उन्हें यथा शक्ति पूजन करना चाहिए |जो संसार रूपी समुन्द्र में डूबे हुए हैं जो पाप रूपी कीचड़ में फसे हुए हैं उनके कल्याण के लिए कामिका एकादशी व्रत उत्तम हैं | कामिका एकादशी से बढकर कल्याणकारी व्रत दूसरा कोई नहीं हैं | हे नारद भगवान ने स्वयं कहा हैं , इसको तुम समझ लो | अध्यात्मविद्यापरायण पुरुषो को जिस फल की प्राप्ति होती हैं उससे अधिक फल कामिका एकादशी काव्रत करने से मिलता हैं |कामिका एकादशी का व्रत करने वाला मनुष्य जो रात्रि जागरण करता हैं उसको यमराज का भय नहीं रहता , और न ही उसकी दुर्गति होती हैं |

कामिका एकादशी का व्रत करने से व्रती कुयोनी में नहीं जाता , मोक्ष को प्राप्त हो जाता हैं | इसलिए विधि पूर्वक यह व्रत करना चाहिए | तुलसी से जो श्री हरि का पूजन करता हैं वह पापों से उसी प्रकार दूर रहता हैं जिस प्रकार कमल प्रकार कमल का पत्ता पानी से दूर रहता हैं | जिसने तुलसी की मंजिरी से श्री हरि का पूजन उसके पापों का लेखा मिटा दिया जाता है | तुलसी दर्शन करने से सब पापों का नाश करने वाली , स्पर्श करने से देह को शुद्ध करने वाली , प्रणाम करने से सब रोगों को दूर करने वाली , सिचने से यमराज को डराने वाली , पौधा लगाने से भगवान के समीप पहुचाने वाली , तथा भगवान के चरणों में अर्पित करने से मोक्ष देने वाली उस तुलसी माता को मेरा बारम्बबार प्रणाम | जो मनुष्य एकादशी के दिन – रात दीपदान करता हैं , उसके पुण्यो की संख्या चित्रगुप्त भी नहीं जानते | एकादशी के दिन भगवान श्री कृष्ण के सम्मुख दीपक जलाने से पितृ देवता स्वर्ग लोक में स्थिर होकर अमृतपान से तृप्त होते हैं |

घी अथवा तेल का दीपक जलाने वाला मनुष्य करोडो दीपकों में प्रकाशित होकर सूर्यलोक को जाता हैं | ये कामिका एकादशी की महिमा मैंने तुमसे कहि हैं ये समस्त पापों को हरने वाली हैं इसका व्रत अवश्य करना चाहिए |यह स्वर्गलोक तथा पूण्य फल प्रदान करने वाली हैं | जो श्रद्धा , भक्ति से इस पुण्यकारी कामिका एकादशी व्रत के महात्म्य को पढ़ता अथवा सुनता हैं वह सब पापों से मुक्त हो विष्णुलोक में जाता हैं |

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