शनिवार [ शनिदेव जी ] की आरती

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Last updated on December 13th, 2017 at 03:20 pm

ॐ शं शनैस्र्च्राय नम:

ॐ भगभवाय विद्मेह मृत्युरूपाय धीमहि तन्नो शनि प्रचोदयात ,

ॐ सूर्य पुत्राय नम:

जय जय शनिदेव महाराज जन के संकट हरने वाले ||

तुम सूर्यपुत्र बलधारी , भय मानत दुनिया सारी जी | साधत हो दुर्गम काज || जन के ० || १ ||

तुम धर्म राज के भाई , जमकुरता पाई जी | घन गर्जन करत आवाज || जन के० ||२ ||

तुम नील देव विकरारी , भैसा पर करत सवारी जी | कर लोह गदा रहे साज || जन के ० ||३ ||

तुम भूपति रंक बनाओ , निर्धन सिर छत्र धराओं जी | समरथ हो करन मम काज || जन के ० || ४ ||

राजा को राज मिटायो , निज भक्तो फेर दिवायो जी | जग में हो रही जय जय कार || जन के ० ||५ ||

तुम हो स्वामी , हम चरण सिर करत नमामि जी | पुरवो जन जन की आस || जन के० || ६ ||

 यह पूजा देव तिहारी हम करत दीन भव ते पारी जी | अंगीकृत करो कृपालु || जन के ० || ७ ||

प्रभु सूचि द्रष्टि निहारो , छभिये अपराध हमारों जी | हैं हाथ तिहारे ही लाज || जन के ० ||८ ||

हम बहुत विपति घबराये , सरनागति तुमरी आये जी | प्रभु सिद्ध करो सब काज || जन के ० || ९ ||

यह विनय ‘ भक्त ‘ सुनावे , नित जय जयकार मनावे जी | तुम देवं के सिर ताज || जन के ० || १० ||