विभूति द्वादशी व्रत का महत्त्व , विधि |Vibhuti Dwadashi Vrat Ki Vidhi Mahatav

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Last updated on August 27th, 2018 at 12:30 pm

विभूति द्वादशी  विभूति द्वादशी व्रत

विभूति द्वादशी का व्रत कार्तिक , बैसाख , मार्गशीर्ष , फाल्गुन , आषाढ़ मास में शुक्ल पक्ष की दशमी  तिथि को स्वल्पाहार करे | संध्या समय व्रत से पूर्व दशमी तिथि को संकल्प लेना चाहिए – प्रभो ! मैं एकादशी को निराहार रहकर भगवान जनार्दन की प्रतिमा का पूजन करूंगा , और द्वादशी को ब्राह्मण भोजन के साथ भोजन करूंगा | हे केशव ! मेरा यह व्रत निर्विध्न सम्पन्न हो जाय और पूर्ण फलदायक हो “ ॐ नमो नारायण “ मन्त्र का जप करते हुए सो जाये |

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एकादशी तिथिं को स्नानादि से निवर्त हो मन ही मन “ ॐ नमो नारायणाय “ मन्त्र का जप करते रहे | पुष्प माला , अक्षत , रोली , मोली , चन्दन से भगवान नारायण का सर्वांग पूजन करे | इस व्रत में भगवान नारायण के दस अवतारों का पूजन किया जाता हैं | इस व्रत में निंदा करना वर्जित हैं |

विभूति द्वादशी व्रत का वर्णन शास्त्रों में वर्णित हैं | इस व्रत को करने से मनुष्य प्रत्येक जन्म में भगवान नारायण का भक्त होता हैं | अनन्त काल तक स्वर्ग में निवास करता हैं | इस व्रत को विधि पूर्वक तीन साल तक करना उत्तम माना गया हैं |

 

 

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