हनुमान जयंती { वीर बजरंग बलि का जन्म दिवस }2020 HANUMAN JAYANTI2020

By | April 6, 2020

हनुमान जयंती विशेष

हनुमान जयंती का पर्व चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता हैं | इस वर्ष हनुमान जयंती का पर्व 8 अप्रैल बुधवार  को हैं | इस दिन को श्री हनुमान जी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है | हनुमान जयंती के  दिन पूजा अर्चना करने के कारण इस दिन की गई पूजा का फल सौ गुना अधिक मिलेगा | चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर चोला चढाने से श्री हनुमान जी की असिम अनुकम्पा प्राप्त होगी , व हनुमान जी को लड्डूवो का भोग लगा कर सभी परिवार जनों में प्रसाद का वितरण करे |

हनुमान जी की आरती पढने के लिए यहाँ क्लिक करे 

“ ॐ श्री हनुमते नम: “ इस मन्त्र से आराधना करे | घर में घी के दीपक जलाये , श्री हनुमान जी की आरती गाये व सभी परिवार जनों व मित्रो के साथ हनुमान चालीसा व सुन्दर कांड के पाठ कर इस वर्ष हनुमान जी की आराधना कर उन्हें प्रसन्न करे |

भारतदेश में हनुमानजी की पूजा अत्यंत व्यापक हैं और कपि रूप में होने पर भी वे एक प्रमुख देवता है | हनुमानजी को सभी मंगलो और उत्सवो का मूल माना गया हैं | प्राणियों के कष्टों को दुर करने वाले रूद्र के अवतार माने गये हैं |

शनिवार व्रत की आरती पढने के लिए यहाँ क्लिक करे 

श्री हनुमान जी भगवान श्री राम के परम् भक्त हैं | शास्त्रों में हनुमानजी व श्री राम के बारे में वर्णन मिलता हैं | वे राम भक्तो के आधार रक्षक और श्री राम मिलन के दूत हैं | जहाँ राम कथा होती हैं , राम भजन होते हैं , हनुमान चालीसा , सुन्दर कांड के पाठ होते हैं वहाँ श्री हनुमान जी उसी क्षण उपस्थित हो जाते हैं |

यत्र      यत्र      रघुनाथकीर्तनं

         तत्र तत्र कृतमस्त कान्जलिम |

वाष्पवारिपरिपूर्णलोचनं

         मारुति नमत राक्षसान्तकम ||

हनुमान जी रूद्र  [ शंकर भगवान ] के अवतार हैं | भगवान शिव ने वानर अवतार धारण क्यों किया इसके पीछे की कथा —

हनुमान जी के सिंदूर प्रेम के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करे 

हनुमान  जी की जन्म कथा

भगवान श्री राम बाल्यकाल से ही सदाशिव की आराधना करते हैं और भगवान शिव भी श्री राम को अपना इष्ट देवता मानते थे |

साक्षात् नारायण ने जब मानव रूप धारण कर श्री राम के नाम से अवतार ग्रहण किया तो शंकर जी ने शिव रूप में मानव रूप में कैसे आराधना करे | अत: उन्होंने मानव रूप में भगवान श्री राम की उपासना की तीव्र लालसा को पूर्ण करने के लिए वानरावतार धारण कर उनकी उनकी नित्य सेवा के लिए सेवक रूप धारण कर माँ अंजना के गर्भ से प्रकट हो गये |

श्री गोस्वामी तुलसीदास जी ने इस रहस्य को दोहावली तथा विनय पत्रिका में प्रकट किया हैं |

 

पवनतनय संकट हरण , मंगल मुरती रूप |

राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ||

श्री हनुमान जी के स्मरण मनुष्यों में बुद्धि , बल , यश , धेर्य , निर्भयता , निरोगता , विवेक ,ज्ञान ,भक्ति आदि गुण स्वभाविक ही आ जाते हैं |

तुलसीदास जी महाराज ने लिखा हैं –

जै   जै   जै  हनुमान  गोसाई  |  कृपा  करहु  गुरु  देव  की  नाई  ||

शनिवार व्रत कथा पढने के लिए यहाँ क्लिक करे 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.