गुरु नानक देव जी का ५५० वां प्रकाशोत्सव Guru Nanak Dev ji ka 550 janmotsav

By | November 13, 2019

गुरु नानक देव जी का ५५० वां प्रकाशोत्सव

Guru Nanak Dev ji ka 550 janmotsv

 श्री गुरु नानक देव जी की प्रकाश तिथि [ जन्म ] कार्तिक पूर्णिमा दिनांक
15अप्रैल,1469 में गाँव तलवंडीरायमोय  , शेइखुपुरा पंजाब और आज का ननकाना साहिब [ वर्तमान पाकिस्तान हैं |

मृत्यु   22सितम्बर, 1539 करतारपुर, पाकिस्तान
महत्वपूर्ण कार्य – विश्व भर में सांप्रदायिक एकता, शांति , सदभावना को बढ़ावा दिया और सिख समुदाय को स्थापित किया |

गुरु नानक देव जी का जन्म वृतांत

गुरु नानक देव जी का प्रारंभिक जीवन

श्री गुरु नानक देव जी का जन्म 15अप्रैल,1469 में गाँव तलवंडी रायमोय जिला शेखुपुरा , पंजाब  में हुआ जो की लाहौर पाकिस्तान से 65KM पश्चिम में स्थित  है। उनके पिता का नाम कालूचंद्र बेदी और माता का नाम  त्रिपता हैं | उनके माता पिता ने उनका नाम नानक रखा। उनके पिता गाँव में स्थानीय राजस्व प्रशासन के अधिकारी थे।अपने बाल्य काल में श्री गुरु नानक जी नें कई प्रादेशिक भाषाएँ सिखा जैसे फारसी और अरबी। उनका विवाह वर्ष 1487 में हुआ और उनके दो पुत्र हुए |

उन्होंने अपने सिद्धांतो और नियमों के प्रचार के लिए २० साल  तक  ४५००० किलोमीटर की यात्रा की और एक सन्यासी के रूप में रहने लगे। उन्होंने हिन्दू और मुस्लमान दोनों धर्मों के विचारों को सम्मिलित करके एक नए धर्म की स्थापना की जो बाद में सिख धर्म के नाम से जाना गया।

भारत में अपने ज्ञान के प्रसार के लिए कई हिन्दू और मुश्लिम धर्म की जगहों का भ्रमण किया।

एक बार वे गंगा तट पर खड़े थे और उन्होंने देखा की कुछ व्यक्ति पानी के अन्दर खड़े हो कर सूर्य की ओर पूर्व दिशा में देखकर पानी डाल रहें हैं उनके स्वर्ग में पूर्वजों के शांति के लिए। गुरु नानक जी भी पानी और वे भी अपने दोनों हाथों से पानी डालने लगे पर अपने राज्य पूर्व में पंजाब की ओर खड़े हो कर। जब यह देख लोगों नें उनकी गलती के बारे में बताया और पुछा ऐसा क्यों कर रहे थे तो उन्होंने उत्तर दिया – अगर गंगा माता का पानी स्वर्ग में आपके पूर्वजों तक पहुँच सकता है तो पंजाब में मेरे खेतों तक क्यों नहीं पहुँच सकता क्योंकि पंजाब तो स्वर्ग से पास है।

पुरे भारत में अपने ज्ञान को बाँटने के पश्चात उन्होंने मक्का मदीना की भी यात्रा की और वहां भी लोग उनके विचारों से अत्यंत प्रभावित हुए और उनके  अनुयायी बन गये |

जब गुरु नानक जी 12 वर्ष के थे उनके पिता ने उन्हें 20 रूपए दिए और अपना एक व्यापर शुरू करने के लिए कहा ताकि वे व्यापर के विषय में कुछ जान सकें। पर गुरु नानक जी नें उस 20 रूपये से गरीब और संत व्यक्तियों के लिए खाना खिलने में खर्च कर दिया। जब उनके पिता नें उनसे पुछा – तुम्हे दिए गये धन का उपयोग तुमने किस प्रकार किया ? तो उन्होंने सहजता से उत्तर दिया – मैंने उन पैसों से सेवा की |

गुरु साहिबान

  • श्री गुरु नानक देव जी
  • श्री गुरु अं नग देव जी
  • श्री गुरु अमरदास जी
  • श्री गुरु रामदास जी
  • श्री गुरु अर्जुनदेव जी
  • श्री गुरु हरिगोविन्द जी
  • श्री गुरु हर राय साहिब जी
  • श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी
  • श्री गुरु तेग बहादुरजी
  • गुरु गोबिंद सिंह जी साहिब

दशम गुरु श्री गुरु गोविन्द सिंह जी महाराज ने बैशाखी 1699 को श्री आनंदपुर साहिब में हिन्दू धर्म के गौरव , संस्कृति व सम्मान के लिए पंज प्यारों को अमृत चखा कर सिंह सजाया और खालसा पन्थ की स्थापना की |

पंज प्यारे

भाई दया  सिंह जी

भाई धर्म सिंह जी

भाई हिम्मत सिंह जी

भाई मोहकम सिंह जी

भाई साहिब सिंह जी

 

 

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