ध्वज नवमी व्रत की कथा सभी सुखो को प्रदान करने वाला व्रत | DHVAJ NAVMI VRAT KI KATHA MNOKAMNA PURTI MANTRA

ध्वज नवमी व्रत की कथा सभी सुखो को प्रदान करने वाला व्रत | DHVAJ NAVMI VRAT KI KATHA MNOKAMNA PURTI MANTRA

ध्वज नवमी व्रत कब किया जाता हैं – ध्वज नवमी व्रत पौष मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को किया जाता हैं |

ध्वज नवमी व्रत का विधान – ध्वज नवमी व्रत को करने के नियम एवं विधि इस प्रकार हैं |

1 ध्वज नवमी व्रत का संकल्प एक दिन पूर्व अष्टमी तिथि को लेना चाहिए |

2 नवमी तिथि को स्नानादि से निर्वत होकर नवीं वस्त्र धारण करना चाहिए |

3 इस व्रत में पूजा के लिए पुष्प स्वयं अपने हाथ से चुनना चाहिए |

4 ध्वजा नवमी के व्रत की पूजा में 108 ध्वज माँ भगवती के सम्मुख स्थापित करे |

5 धुप , दीप ,न्वैध्य , गंध ,पुष्प , चन्दन , पुष्पमाला , वस्त्र ,पंचामृत , फल से माँ भगवती का विधिवत पूजन करना चाहिए |

6 नौ कन्याओं का पूजन करना चाहिए स्वादिष्ट भोजन तथायथा शक्ति दान दक्षिण देनी चाहिए |

7 ब्राह्मण भोजन तथायथा शक्ति दान दक्षिण देनी चाहिए |

ध्वजा नवमी व्रत क्यों किया जाता हैं – नवमी तिथि माँ भगवती को अत्यंत प्रिय हैं क्यों की इस दिन माँ भगवती ने असुरो पर विजय प्राप्त की थी | विधिवत ध्वज नवमी का व्रत करने से विजय की प्राप्ति होती हैं |

ध्वजा नवमी व्रत करने की कथा – माँ भगवती ने धर्म की रक्षा के लिए अनेक रूप धारण करअसुरों का संहार किया | महिसासुर के पुत्र रक्तासुर ने ब्रह्माजी की तपस्या कर तीनो लोको पर राज्य प्राप्त करने का वरदान ले लिया | रक्तासुर ने देवताओ पर आक्रमण कर दिया ब्रह्माजी के वर के कारण देवता हरने लगे तब माँ भगवती के नौरूपों [ महालक्ष्मी , नन्दा , क्षेमकरी , शिवदूती , महारुंडा , भ्रामरी , रेवती , सिद्धिदात्री माँ का भक्तिपूर्वक पूजन किया तब माँ भगवती ने महाविशाल रूप धारण कर क्षण भर में ही अनेक दैत्यों का विनाश कर उनके असंख्य ध्वज , आयुध देवताओं को सोंप दिए  | देवताओं ने विजय प्राप्त कर माँ भगवती की जीत का उत्सव मनाया |