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🌿 Nirjala Ekadashi

📅 25 Jun 2026 8 days
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Vrat Date
25 Jun 2026
पारण Time
June 26, 2026, from 5:25 AM to 8:13 AM
Countdown
8 days
पारण (Breaking Fast)
June 26, 2026, from 5:25 AM to 8:13 AM

निर्जला एकादशी क्यों मनाई जाती है? जानिए इसका आध्यात्मिक महत्व

भारत में साल भर कई एकादशियां आती हैं, लेकिन उनमें से निर्जला एकादशी का विशेष स्थान माना जाता है। यह केवल एक धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि आत्मसंयम, श्रद्धा और भगवान विष्णु के प्रति समर्पण का प्रतीक है। मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत करता है, उसे वर्ष भर की सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होता है।

निर्जला एकादशी का अर्थ क्या है?

“निर्जला” शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – नि अर्थात बिना और जल अर्थात पानी। यानी ऐसा व्रत जिसमें पूरे दिन अन्न तो दूर, पानी तक ग्रहण नहीं किया जाता। यही कारण है कि इसे सबसे कठिन और तपस्वी व्रतों में गिना जाता है।

हालांकि आज के समय में स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कई लोग जल या फलाहार के साथ भी यह व्रत रखते हैं। धर्म में भावना और श्रद्धा को सबसे अधिक महत्व दिया गया है।

निर्जला एकादशी क्यों मनाई जाती है?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत काल में भीमसेन को अत्यधिक भूख लगती थी और वे अन्य पांडवों की तरह नियमित रूप से एकादशी का व्रत नहीं रख पाते थे। जब उन्होंने इस समस्या का समाधान महर्षि व्यास से पूछा, तो व्यास जी ने उन्हें ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला व्रत रखने की सलाह दी।

कहा जाता है कि इस एक दिन के कठोर व्रत से सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त हो सकता है। तभी से यह एकादशी विशेष महत्व रखने लगी और इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाने लगा।

निर्जला एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

निर्जला एकादशी केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है। इसका वास्तविक उद्देश्य मन और इंद्रियों पर नियंत्रण प्राप्त करना है।

जब व्यक्ति एक दिन के लिए अपनी शारीरिक इच्छाओं पर संयम रखता है, तो उसका मन अधिक शांत और एकाग्र होता है। भगवान विष्णु की भक्ति, मंत्र जाप, पूजा और दान-पुण्य के माध्यम से व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से स्वयं को मजबूत महसूस करता है।

इस व्रत का संदेश यह भी है कि जीवन में सुख-सुविधाओं के बीच भी आत्मनियंत्रण और अनुशासन का महत्व कभी कम नहीं होना चाहिए।

इस दिन दान का महत्व

निर्जला एकादशी के दिन जलदान, अन्नदान, वस्त्रदान, छाता, पंखा और जरूरतमंदों को भोजन कराने का विशेष महत्व माना जाता है। ज्येष्ठ मास की गर्मी में प्यासे और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना पुण्यदायक माना गया है।

धार्मिक दृष्टि से यह दिन केवल उपवास करने का नहीं, बल्कि सेवा और परोपकार करने का भी अवसर है।

2026 में निर्जला एकादशी कब है?

वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी 25 जून, गुरुवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और दान-पुण्य का विशेष महत्व रहेगा।

निष्कर्ष

निर्जला एकादशी हमें केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि संयम, अनुशासन और सेवा का भी संदेश देती है। चाहे कोई पूर्ण निर्जल व्रत रखे या अपनी क्षमता के अनुसार उपवास करे, इस दिन का मूल उद्देश्य भगवान विष्णु का स्मरण, आत्मशुद्धि और मानव सेवा है। यही कारण है कि हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी को सबसे महत्वपूर्ण और पुण्यदायी एकादशियों में से एक माना गया है।

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