शीतला सप्तमी की कहानी [ बासौडा ] | Shitla Saptmi ki Kahani

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Last updated on March 7th, 2018 at 08:38 am

होली के 7 दिन बाद शीतला सप्तमी का त्यौहार मनाया जाता हैं | इस वर्ष शीतला सप्तमी गुरुवार  शीतला सप्तमी के दिन शीतला माता का पूजन किया जाता हैं | शीतला सप्तमी का पर्व बड़ी धूम धाम से मनाया जाता हैं | ऐसी मान्यता हैं की इस दिन गर्म खाना नहीं बनाते और खाते भी नही हैं | एक दिन पूर्व ही खाना बनाते हैं और शीतला माता का पूजन कर घर के सभी सदस्य ठंडा [बासी ] खाना खाते हैं | जिस घर में शीतला माता का पूजन और व्रत शुद्ध मन से किया जाता हैं वहाँ शीतला माता धन – धान्य , सुख़ – समृद्धि , आरोग्य , बच्चो पर चेचक [ बोदरी , छोटी माता ] आदि से से रक्षा करती हैं |

शीतला माता के पूजन के लिए भोग में पूरी , पापड़ी , हलवा, लापसी , चावल , राबड़ी अपनी इच्छा के अनुसार जैसी परम्परा हो बनाये | सुबह [ प्रात: काल } रोली , मोली ,  काजल , मेहँदी , बाजरे के दाने , दही , कच्चा दूध , जल का लोटा , जों भोग बनाया हैं व , ब्लाउज पीस ,पैसे , आदि सामग्री लेते हैं | शीतला माता के पूजन के पश्चात पथवारी माता की पूजा करनी चाहिए , पुजा के बाद बाजरे के दाने हाथ में लेकर कहानी सुनते हैं | बाजरे के दाने से खेत भी बोते हैं | ऐसी मान्यता हैं की गणगौर पूजन करने वाली महिलाये इसी दिन ज्वारे बोती हैं |

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  शीतला माता की कहानी

हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार चेत्र का महिना आया | होली बाद के दिन आये , शीतला सप्तमी माता आई | सभी लोग कहने लगे “ माता आई “ “ माता आई “ शीतला माता के स्वागत के लिए किसी ने हलवा बनाया , किसी ने लापसी | माता के गर्म खाने का भोग लगाया , माता के अंग अंग में आग जलने लगी तो माता दोडी – दोडी कुम्हार के घर गई | कुम्हार को कहा , “ मेरा अंग – अंग जल रहा हैं कुम्हार ने माँ के ठंडी मिट्टी से लेप कर दिया , शीतला माता को थौड़ा आराम मिला बोली बेटा मुझे भूख लगी हैं | कुम्हार के घर रात की बनी रोटी राबड़ी रखी थी , उसने माता को खिला दी, इससे माता का ताप शांत हुआ और कुम्हार पर प्रसन्न हो बोली सारी नगरी में हा हा कार होगा , केवल तेरा घर बचेगा और तेरे घर में सदा अन्न धन के भंडार भरे रहेंगे |

सूरज [ सूरज रोट ] रविवार की कहानी पढने के लिए यहाँ क्लिक करे

सारी नगरी में त्राहि –त्राहि करने लगे और कुम्हार का घर बच गया | सारे लोगो ने कुम्हार से पूछा कुम्हार तूने क्या जादू किया जिससे सारा नगर नष्ट हो गया और तेरा घर बचा रहा | कुम्हार बोला मैंने माता को शीतल किया तुम सब ने माता को गर्म भोजन करवाया जिससे माता के अंग – अंग में छाले में हो गये थे इसी कारण माता का कोप हुआ और नगर में त्राहि त्राहि मच गई | लोगो ने पूछा माता कहाँ हैं ? तो कुम्हार कहने लगा माता नीम की छाया में बैठी हैं | सभी शीतला माता की शरण में गये और माता से क्षमा मांगी और माता ने कहा ! तुमने मुझे गर्म भोजन खिलाया जिससे मेरे मुँह में छाले हो गये | कुम्हार ने मुझे ठंडा भोजन करवाया , जिससे मुझे ठंडक मिली | इसी कारण सारा नगर नष्ट हो गया |” और कुम्हार का घर महल बन गया | लोगो ने विनती की माता अब क्या करे | “ तो माता बोली होली के सात दिन बाद शीतला सप्तमी आती हैं , उस दिन सब नगर निवासी छठ को बनाये खाने से मेरी पूजा करे व भोग लगाये और माता अंतर्धयान हो गई | अगले साल शीतला सप्तमी आई सब ने ठंडा बनाया भोग लगाया माता की पूजा की  जिससे माता प्रसन्न हुई और सारी नगरीमें आनन्द हो गया |

हे शीतला माता ! जैसे सारे नगर वासियों को क्षमा किया , उन पर प्रसन्न हुई वैसे सभी पर प्रसन्न रहना , भूल – चुक क्षमा करना | इसके बाद पथवारी माता व गणेश जी की कहानी सुनना चाहिए |

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गणेश जी की कहानी पढने के लिए यहाँ क्लिक करे