श्री संकटनाशनगणेशस्त्रोत | Sankat Nashan Ganesh Stotram

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संकट नाशन गणेश स्त्रोत्रम भगवान गणपति जी का अत्यंत प्रभावशाली स्त्रोत्र हैं | इस स्त्रोत्र का नित्य पाठ करने से सभी विपत्तियों का नाश हो जाता हैं | प्रात: काल भगवान गजानन्द के ध्यान मात्र से ही जीवन की राह आसन हो जाती हैं | जीवन में खुशिया ही खुशिया आती हैं | गणपति स्त्रोत्र का पाठ 11 , 21 बार नित्य पाठ करने से सभी मनोकामनाए पूर्ण हो जाती हैं

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 श्री संकटनाशनगणेशस्त्रोत

श्री गणेशाय नम: | नारद उवाच |

प्रणभ्यं शिरसा देव गौरी पुत्रं विनायकम |

भक्तया व्यासं: स्म्रोनित्य्मायू: कामार्थसिद्धये || 1 ||

प्रथमं वक्रतुंड च एकदन्त द्धितीयकम |

तृतीय कृष्णपिंगात्क्षं गजववत्रम चतुर्थकम || २ ||

लम्बोदरं पंचम च पष्ठं विकटमेव च |

सप्तमं विध्नराजेन्द्र धुम्रवर्ण तथाष्टमम || 3 ||

नवमं भाल चन्द्र च दशमं तू विनायकम |

एकादशं गणपति द्वादशं तु गजानन || 4 ||

द्वाद्शैतानी नामानी त्रिसन्ध्य: पठेन्नर: |

न च विध्न्भयं तस्य सर्व सिद्धिक्रं प्रभो || 5 ||

विद्धार्थी लभते विद्धा धनार्थी लभते धनम |

पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मो क्षार्थी लभते गतिम || 6 ||

जपेदणपतिस्त्रोत्रम षडिभमार्से: फलं लभते |

संवत्सरे ण सिद्धि च लभते नात्र संशय: || 7 ||  

अष्टभ्यो ब्राह्मणे भ्यंश्र च लिखित्वा फलं लभते |

तस्य विद्धा भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत: || 8 ||

| इति श्री नारद पुराण संकट नाशनं नाम श्री गणपति स्त्रोत्रं सम्पूर्णम ||

भगवान  गणपति का स्वरूप अत्यंत मनोहर एवं मंगलदायक हैं | वे एक दंत  और चतुर्बाहू हैं |वे अपने चारों हाथो में पाश , अंकुश , दंत और वरमुद्रा धारण करते हैं | उनके ध्वजों में मुश्क का चिन्ह हैं  | वे  रक्त वर्ण , लम्बोदर , शूर्पकर्ण तथा  लाल रंग  वस्त्र धारी हैं | उन्हें लाल रंग के पुष्प अत्यंत प्रिय हैं |वे अपने उपासको पर कृपा करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं |

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||जय गणेश ||                                                                           || जय गणेश ||