मकर संक्रान्ति , 14 जनवरी 2021 महत्त्व , धार्मिक रीतिरिवाज | Makar Sankranti 14 January 2021

By | January 10, 2021
Makar Sankranti 14 January 2021

  मकर संक्रान्ति , 14  जनवरी 2021 

गुरुवार

 Makar Sankranti 14 January 2021   

 पौष महीने में मकर संक्रान्ति आती हैं | पुराणों में इस दिन का बहुत महत्त्व हैं | संक्रान्ति पर किये गये दान पुण्य अक्षुण होते हैं | पौष माह में जब सूर्य मकर राशी पर आता हैं तब इस पर्व को मनाया जाता हैं | इस दिन सूर्य का उत्तरायण आरंभ होता हैं कर्क संक्रांति के काल को दक्षिणायन कहते हैं  इस दिन विशेष रूप दान पुण्य सूर्य पूजन का विशेष महत्त्व हैं |  तथापतंग उड़ा कर बच्चे व बड़े आनन्द लेते हैं |

इस दिन किसी तीर्थ स्थान पर स्नान करने का विशेष महत्त्व हैं व घर पर भी पानी में गंगा जल व तिल  डालकर स्नान करना   चाहिए | इस दिन काले तिल के लड्डू , दाल चावल मिलाकर खिचड़ी का दान करना चाहिए | इस दिन विवाहित स्त्रियों को सफेद तिल के लड्डू , फीणी और ग्याहर रुपया रख कर सासुजी को पाँव लग कर देना चाहिए | भोजन में बाजरे की खिचड़ी व तिल का तेल अवश्य खाना चाहिए | अपनी बहन बेटियों को तिल के लड्डू , फीणी , खिचड़ी ,  गाजर का हलवा , दाल की पकोड़ी खिलाना चाहिए व श्रद्धानुसार दक्षिणा देना चाहिए | इस दिन स्त्रियाँ 13 वस्तुएं कलपकर 13 स्त्रियों को देती हैं | अन्य दान योग्य वस्तुये बर्तन , तिल , गुड , गाय , अश्व , स्वर्ण , गजक , हल्दी कुमकुम के दान को अत्यंत शुभ माना हैं इस दिन किया गया दान कभी समाप्त नहीं होता हैं इसका फल आने वाली सात पीढ़ियों को मिलता हैं | इस मकर एक संकल्प अवश्य ले व अपने रीतिरिवाज परम्पराओं की रक्षा करे |

मकर संक्रान्ति के विशेष महत्त्व को समझते हुए हमारे बुजुर्गो ने कुछ दान पुण्य की परम्पराए बनाई हुई हैं इससे परिवार के सदस्यों में मेल – जोल बना रहता हैं व आपसी प्यार बढ़ता हैं व भारतीय परम्पराये जों विलुप्त होती जा रही हैं उन्हें सार – सम्भाल कर रखे व अपनी आने वाली पीढियों को दे ये खुबसुरत संस्कार इन्हे खोने न दे | हिन्दू सभ्यता व संस्कृति की इस अनमोल देन को इस मकर संक्रान्ति पर करे कुछ खास दान पुण्य |

घाट – पाट —

इसको जों विवाह योग्य कन्या हो उसे विवाह के साल यह नेग करवाये | घाट – पाट सीचना संक्रान्ति से शुरू करें | अपने घर के सामने थौड़ा गोबर का तालाब बना कर जल का छिटा देकर रोली की सात बिन्दी  लगाकर जल सीचते हुए बोलती जाये “ सीचुंगी घाट – पाट , पाऊँगी राज – पाट “ इस तरह पूरे एक वर्ष तक करे | साल पूरा होने पर उद्यापन कर दे | उद्यापन में एक साड़ी ब्लाउज का बेस किसी ब्राह्मणी को दे |

चिड़िया मुठ्ठी

मकर संक्रान्ति से रोज एक मुठ्ठी चावल चिड़िया को देवे | इस तरह पूरे एक वर्ष करे फिर उद्यापन कर देवें | उद्यापन में एक चांदी की चिड़िया बनाकर चावल व रुपया निकाल कर सासुजी को कलपना निकाल कर सासुजी को पाँव लग कर देवें |

कोठी मुठ्ठी

इस मकर  संक्रान्ति से अगली  मकर संक्रान्ति तक रोज एक मुठ्ठी चावल निकाल कर एक बर्तन में डालती जावें बर्तन भर जाने पर किसी ब्राह्मण को चावल दान कर देवें |साल पूरा होने पर उद्यापन कर देवें | उद्यापन में एक कटोरे में चावल, रूपये रख कर सासुजी पाँव लग कर देवें |

भगवान के पट खुलवाना –

मन्दिर में एक पर्दा और मिठाई , रुपया ले जाकर पर्दा लगावें फिर ओरतो के साथ मंगल गीत गाते हुयें पर्दा खुलवाये | मिठाई का भोग लगाकर प्रसाद भक्त जनों में बाँट देवे | इस को करने पर रुके हुए कार्य पूर्ण हो जाते हैं | भाग्य उदय होता हैं |

 सास को सीढि चढ़ाना

मकर संक्रान्ति के दिन बहू सास को सीढि चढ़ाती हैं | पहली सीढी पर श्रद्धानुसार रूपये रख्रे फिर अगली सीढी पर बढ़ाती जावे और कहती जाये “ सासुजी आपको सीढी चढ़ाऊँ आपका मान बढ़ाऊँ |’ परिवार की अन्य महिलाये मंगल गीत गाये |

सूती सेज जगाना

मकर संक्रान्ति को सास – ससुर को सुबह प्रात: ओरतो को बुलवाकर गीत गाते हुए जगाये व दरवाजा खोलने पर सास – ससुर को उनकी पसंद की ड्रेस , मिठाई  भेट करें व सास ससुर जी का आशीर्वाद ले | इससे  घर में आपसी प्यार बढ़ता हैं|

रूठी हुई सास को मनाना

यह एक पुरानी परम्परा हैं | सास बहु में प्यार व स्नेह बढ़े इसके लिएसास किसी पड़ोसी के घर जाकर बैठ जाती हैं फिर बहूँ ओरतो को साथ लेकर एक थाल में साड़ी ब्लाउज का बेस रख कर सासुजी की मनपसन्द मिठाई रख कर गीत गाते हुए मनाती | सासुजी को बेस पहना कर मिठाई खिलाकर कहें – रूठो मत सास , खावो मिठाई का ग्रास , मैं सेवा करूं आपकी , आप रखो लाज हमारी | फिर सास को पाँव लग कर रूपये देवें |

इसी तरह परिवार के अन्य सदस्यों को भी नेग देवें –

ससुर के नेग

लो ससुर जी घुड की भेली , दिखाओं आपकी हवेली |

यह कह कर ससुरजी को कपड़े व रूपये नेग में देते हैं |

ननद के नेग –

डिब्बी में पान , पान में सुपारी , ननद लगे हमें बड़ी प्यारी |

पहनो ननद अंगूठी , घर में लावों खुशिया |

ननदोई के नेग

लो गोला , ननदोई मेरा भोला |

थाली में आंवला ननदोई मेरा सांवला |

देवर का नेग

देवर को घेवर के ऊपर रुपया रख कर देवे |

जेठ के नेग

सरस गिलोरी सुन्दर पान , रखु जेठजी आपका मान |

आल्या चावल खूंटी चीर –

पहले नन्द को भोजन करवाए खाने में चावल अवश्य बनाये | फिर खूंटी पर साड़ी ब्लाउज टांग देवे | भाभी नन्द से कहे – “ आल्या चावल खूंटी चीर , देखो भाभी म्हारा बीर | “ यह बात कह कर अपने भाई को दिखा देवें | भाभी नन्द के पाँव लग कर खूंटी पर टंगी साड़ी ब्लाउज नन्द को दे कर पाँव लग कर रुपया देवे |

नन्द की पस भरें

नन्द का हाथ रूपये से भरकर बोले — “ भर नन्द पस नन्द हंस |”

पति का नेग

आधे गिट में दाख भरे ऊपर रुपया रख कर पति को देवें और कहें –

भरिया गिट दाखां को , पिया पायो लाखा को | “ कहकर दाखो से भरा गिट और रुपया पति को देवें |

 

ब्राह्मण के नेग

  • एक मटके में दही झेरनी रस्सी और रुपया देवें |
  • ब्राह्मणी के सिर में तेल डालकर , तेल , कंघा , दर्पण और सुहाग का सारा सामान देवें |
  • ब्राह्मणी को नहलाकर कपड़ा , बाल्टी , लोटा और रुपया देवे |
  • ब्राह्मण व ब्राह्मणी को बारह महिना तक जिमा करके कपड़ा और रुपया देवें |

 

मकर संक्रांति

 

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