माघ स्नान – विधि , पौराणिक महत्त्व

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इस मास  में मनुष्यों को स्नान कर्म में शिथिलता रहती हैं ,फिर भी माघ स्नान का विशेष फल होने से इसकी विधि का वर्णन कर रहा हूँ | जिसके हाथ , पाँव , वाणी , मन अच्छी तरह संयत हैं और जों विद्धा , तप तथा कीर्ति से समन्वित हैं ,उन्हें ही तीर्थ स्नान दान आदि पुण्य कर्मो का शास्त्रों में निर्दिष्ट फल प्राप्त होता हैं |प्रयाग , पुष्कर ,कुरुक्षेत्र आदि तीर्थो में या घर में जहाँ कही भी प्रात:काल ही स्नान करना आवश्यक हैं |

माघ मास में सूर्योदय से पूर्व स्नान करने से सभी महापाप दुर हो जाते हैं और प्राजापत्य – यज्ञ का फल प्राप्त होता हैं | जों स्त्री या पुरुष बालक सदा प्रातकाल स्नान करता हैं , वह सभी पापों से मुक्त होकर परब्रह्म को प्राप्त कर लेता हैं | उष्ण जल से स्नान , बिना ज्ञान के मन्त्र का जप , श्रोत्रिय ब्राह्मण के बिना श्राद्ध और सायंकाल के समय भोजन व्यर्थ होता हैं |

स्नान चार प्रकार के होते हैं —

  • वायव्य
  • वारुण
  • ब्राह्म
  • दिव्य

गायों के रज से – वायव्य

मन्त्रों से  – ब्राह्म

समुन्द्र , नदी , तालाब इत्यादी जल से – वारुण

वर्षा के जल से स्नान करना — दिव्य स्नान

इनमें वारुणस्नान विशिष्ट स्नान हैं |

माघ स्नान के नियम —

पौष – फाल्गुन के मध्य मकर के सूर्य में तीस दिन प्रात: माघ स्नान करना चाहिये |  ये तीस दिन विशेष पुण्यकारी हैं | माघ के प्रथम दिन ही संकल्प पूर्वक माघ स्नान का नियम ग्रहण करना चाहिये | स्नान करते जाते समय व्रती को बिना वस्त्र ओढे जाने से अस्र्व मेघ यज्ञ का फल होता हैं | तीर्थों में जाकर स्नान कर मस्तक पर मिट्टी लगाकर सूर्य को अर्ध्य देकर पितरों का तर्पण करे | जल से बाहर  निकल कर इष्टदेव को प्रणाम कर शंख –चक्र धारी पुरुषोतम भगवान श्री माधव का पूजन करे |

अपनी सामर्थ्य अनुसार यदि हो सके तो प्रतिदिन हवन करे , एक बार भोजन करे , ब्रह्मचर्य – व्रत धारण करे और धरती पर शयन करे |

असमर्थ होने पर जितना हो सके उतना नियम पालन करे परन्तु स्नान अवश्य करे |

तिल का उबटन , तिलमिश्रित जल से स्नान ,तिलों से पितृ तर्पण , तिल का हवन , तिल का दान और तिल से बनी हुइ सामग्री का भोजन करने से किसी प्रकार का कष्ट नहीं होता | तेल और आंवले का दान करना चाहिये |इस प्रकार एक माह तक स्नान कर अंत में वस्त्र , आभूषन , भोजन आदि देकर ब्राह्मण का पूजन करे और कम्बल ,वस्त्र ,कपड़े , रजाई , जूता तथा जों भी शीत निवारक वस्त्र हैं , उनका दान कर ‘ माधव: प्रीयताम ‘ यह वाक्य कहना चाहिए | इस प्रकार माघ स्नान करने से सभी पाप नष्ट होते हैं |

माघ स्नान से पिता , पितामह , प्रपितामह , माता , मातामह , वृद्धमातामह आदि इक्कीस कुलों सहित समस्त पितरो आदि का उद्धार कर और सभी आनन्दों को प्राप्त कर अंत में विष्णु लोक प्राप्त करता हैं |