बसन्त पंचमी का पौराणिक महत्त्व , कथा | Vasant Panchami Dates 2019

Spread the love
  • 937
    Shares

Last updated on December 14th, 2018 at 01:43 pm

 

बसन्त पंचमी  10 फरवरी  2019 

बसन्त पंचमी  10 फरवरी  2019  को हैं बसन्त पंचमी का दूसरा नाम श्री पंचमी भी हैं |  पुजा का शुभ मुहर्त प्रात: 07 बजकर 17 मिनट से लेकर 12 बजकर 32 मिनट तक हैं | इस दिन विद्या  की देवी सरस्वती का पूजन किया जाता हैं | बसन्त पंचमी माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती हैं | देवी भागवत के अनुसार देवी सरस्वती की पूजा सर्वप्रथम भगवान श्री कृष्ण ने कि  थी  | विद्या  की देवी सरस्वती का बसन्त पंचमी के दिन जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता हैं | इसी दृष्टी से बसन्त का मोसम सभी के लिए बहुत मायने रखता हैं | बसन्त पंचमी के दिन माँ सरस्वती अपने भक्तों को विद्या का  दान देती हैं | यह दिन विशेष रूप से विद्याथियो  के लिए महत्वपूर्ण हैं | पीले रंग के वस्त्र , पीले पुष्प माँ सरस्वती को अत्यंत प्रिय हैं |

शुभ्रवसना , विणा वादिनी ,मंद मंद मुस्कुराती हंस पर विराजमान माँ सरस्वती मानव जीवन में अज्ञान रूप जड़ता को दुर कर ज्ञान के प्रकाश से आलौकिक करती हैं |

 

सबसे पहले माँ सरस्वती का ध्यान करे —

यथा तू देवी भगवान ब्रह्मा लोकपितामह: |
त्वां परित्यज्य नो तिष्ठेत तथा भव वरप्रदा |
वेदशास्त्राणी सर्वानी नृत्यगीतादिकं च यत |
वाहितं यत त्वया देवी तथा में सन्तु सिद्धय: ||
लक्ष्मीमेधां वरा रिष्टिगौरी तुष्टि: प्रभा मति |
एताभि: पाहि तनुभीरष्टाभिमाँ सरस्वती ||

हे देवी ! जिस प्रकार लोक पितामह ब्रह्मा आपका परित्याग कर कभी अलग नहीं रहते , उसी प्रकार आप हमें भी वर दीजिये की हमारा कभी अपने परिवार के लोगों से वियोग ना हो |

हे देवी ! वेदादि सम्पूर्ण शास्त्र तथा नृत्य गीतादि जों भी विद्याये  हैं , वे सभी आपके अधिष्टान में ही रहती हैं , वे सभी मुझे प्राप्त हो |

हे भगवती सरस्वती देवी ! आप अपनी — लक्ष्मी , मेधा , वरा , रिष्टि , गौरी , तुष्टि , प्रभा , मति —इन आठ मूर्तियों के द्वारा मेरी रक्षा करे |

 बसन्त पंचमी की पौराणिक कथा

 

सृष्टि के प्रारम्भ में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा जी ने जीवों विशेष तौर पर मनुष्य योनि की रचना की | परन्तु ब्रह्मा जी अपनी रचना से संतुष्ट नहीं थे | उन्हें लगता था की कुछ कमी रह गई जिसके कारण चारों और मौन छाया रहता हैं | भगवान विष्णु से आज्ञा लेकर ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का , पृथ्वी पर जल कण बिखरते ही उसमें कम्पन होने लगा | इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अदभुत शक्ति का प्रकट हुई | यह एक चतुर्भुजी सुन्दर स्त्री थी जिसके एक हाथ में विणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा के रूप में था | अन्य दोनों हाथो में पुस्तक तथा  माला थी |जब इस देवी ने विणा का मधुर नाद किया तो संसार के समस्त जिव – जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई , तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती का नाम दिया |

सरस्वती को वागिस्र्व्री , भगवती , शारदा ,वीणावादिनी , और वांग देवी सहित अनेक नाम से पूजा जाता हैं | संगीत की उत्पति करने के कारण वे संगीत की देवी भी हैं | बसन्त पंचमी को इनके जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं |

पुराणों के अनुसार श्री कृष्ण ने सरस्वती से खुश होकर उन्हें वरदान दिया  था , की बसन्त पंचमी के दिन तुम्हारी आराधना की जायेगी | इस कारण बसन्त पंचमी के दिन माँ सरस्वती का विद्या  की देवी के रूप में पूजा की जाती हैं |

प्रतिदिन जी विद्यार्थी इस कथा को सुनता हैं व मन्त्र का प्रसन्नचित मन से माँ सरस्वती का ध्यान करता हैं उसकी सभी मनोकामनाए पूरी हो जाती हैं |