श्री शालग्राम भगवान की पूजन विधि , महत्त्व

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भारतीय हिन्दू परिवारों में हर घर में प्रतिदिन भगवान का पूजन किया जाता हैं | अपने घर के मन्दिर में लड्डू गोपाल जी , शिवलिंग , गणेश जी , भगवान शालग्राम जी का पूजन नित्य प्रति किया जाता हैं | पूजन में सही विधि का ज्ञान होना आवश्यक हैं | वैदिक विधि से पूजन करना आवश्यक माना गया हैं | इसलिये शालग्राम भगवान का महत्त्व व पूजन विधि यहाँ दी जा रही हैं ——

भगवान शालग्राम का महत्त्व व पूजन विधि —-

श्री शालग्राम साक्षात् सत्यनारायण भगवान हैं , नारायणस्वरूप हैं | इसलिये इसमें प्राण प्रतिष्ठा आदि संस्कारो की आवश्यकता नहीं होती | इनकी पूजा में आवाह्न और विसर्जन नहीं भी नही होता | इनके साथ देवी भगवती का नित्य संयोग माना गया हैं |

शयन के समय तुलसी – पत्र को शालग्राम जी से हटाकर पार्श्व में रख दिया जाता हैं | जहा शालग्राम जी होते हैं वहाँ सभी तीर्थ और मुक्ति भुक्ति का वास होता हैं | शालग्राम का चरणोदक सभी तीर्थो से अधिक पवित्र माना गया हैं | शालग्राम की पूजा सम संख्या में शुभ [अच्छी ] मानी जाती हैं , किन्तु सम संख्या में दो शालग्राम निषेध हैं | विषम संख्या में एक शालग्राम की पूजां की जाती हैं |

पूजन विधि

शालग्राम की नित्य पूजा में शालग्राम भगवान को किसी पवित्र पात्र में रख कर पुरुष सूक्त का पाठ करते हुए पाठ करते हुए पंचामृत अथवा शुद्ध जल से अभिषेक कराने के बाद मूर्ति को शुद्ध वस्त्र से पोंछ कर गंध युक्त तुलसीदल के साथ किसी सिंहासन अथवा यथास्थान पात्रादी में विराजमान कराकर ही पूजा प्रारम्भ की जाती हैं |

स्तुति प्रार्थना

गणपति – गौरी स्मरण पूर्वक भगवान शालग्राम इस प्रकार ध्यान करना चाहिए —–

शान्ताकारम भुजगशयनं पद्मनाभम सुरेशं

विश्वधारम गगनसदृशं मेघवर्णम शुभांगम |

लक्ष्मीकान्तं कमलनयन योगिभिध्यार्न्गम्ये

वन्दे विष्णुं भवभयहरमू सर्वलोकैकनाथम ||

प्रतिदिन भगवान शालिग्राम को नैवैध्य का भोग लगाये और अखंड ऋतूफल समर्पित करे , परिवार के साथ आशीर्वाद ग्रहण करे |

|| जय बोलो सत्यनारायण भगवान की जय ||

|| जय बोलो शालिग्राम भगवान की जय ||