शंख का धार्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व | Shnkh Ka Dharmik Aur Vaigyaanik Mahattv

By | May 29, 2019

शंख का धार्मिक  महत्व

पूजा के समय जो व्यक्ति शंख ध्वनी करता हैं उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और भगवान विष्णु के लोक में निवास करता हैं | अथर्ववेद के अनुसार शंख ध्वनी से सभी राक्षसों का अंत होता हैं | प्रात: और सांयकाल जब सूर्य की किरने निस्तेज होती हैं तब शंख बजाने का विधान हैं | यजुर्वेद के अनुसार युद्ध के समय शंख ध्वनी शत्रुओ का हृदय दहलाती हैं | समुन्द्र मंथन में 14 रत्नों में से एक रत्न शंख हैं | शखं को घर में स्थापित करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती हैं | शंख एक सागर के जलचर का बनाया हुआ ढांचा हैं जो की हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया हैं |

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार शंख चन्दमा और सूर्य के समान देवस्वरूप हैं | इसके मध्य में वरुण , पृष्ठ भाग में ब्रह्मा अग्र भाग में गंगा और सरस्वती का निवास हैं | सभी वैदिक कार्यो में शंख का महत्त्वपूर्ण स्थान हैं | शंख नाद का प्रतीक हैं | शंख को ॐ का प्रतीक मन जाता हैं |हिन्दू संस्कृति में पूजा और अनुष्ठान के समय शंख वादन की परम्परा हैं | जैन , बोद्ध , शैव , वैष्णव सभी समुदायों में शंख वादन शुभ माना गया हैं |

शंख की उत्पति पानी से होती है पानी जीवन का प्रतीक हैं इसलिए इसे जीवन का प्रतीक माना जाता हैं |

शंख के प्रकार

शंख मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं –

दक्षिणावर्ती शंख – जिसका मुख दाहिने हाथ की और खुलता हो या दक्षिण दिशाकी और खुलता हो उसे दक्षिणावर्ती शंख कहा जाता हैं | इसे लक्ष्मी स्वरूप कहा जाता हैं | यह स्वरूप लक्ष्मीजी को अत्यंत प्रिय हैं | शंख में दुध भरकर अभिषेक करने से समस्त पापो का नाश होता हैं |

मध्यवर्ती शंख – जिस शंख का मुंह बिच में से खुलता हो उसे मध्यावर्ती शंख कहते हैं |

वामावर्ती शंख –  जिसका मुख बांयी और खुलता हो | यह चमत्कारिक शंख मानाजाता हैं | शंख प्रातकाल और सांयकाल बजाना चाहिए | शंख पूजा के प्रारम्भ और अंत में बजाया जाता हैं | दक्षिणावर्ती और मध्यावर्ती शंख दुर्लभता से मिलता हैं | इनके चमत्कारिक गुणों के कारण अधिक मूल्यवान हैं | इसके अलावा लक्ष्मी शंख , गोमुखी शंख , कामधेनु शंख , विष्णु शंख , देव शंख , चक्र शंख , शेषनाग शंख , कच्छप शंख आदि प्रकार होते हैं |

शंख ध्वनी के लाभ

शंख ध्वनी जहाँ तक जाती हैं , वहाँ तक अनेक सूक्ष्म कीटाणुओं का नाश हो जाता हैं | वातावरण शुद्ध होता हैं | शंख बजाने वाले व्यक्ति को कभी साँस समन्धित बिमारिया नहीं होती हैं |

प्रात व सांयकाल जब सूर्य की किरने निस्तेज होती ही तभी शंख बजाने का विधान हैं | इससे वातावरण शुद्ध होता हैं | बर्लिन युनिवर्सिटी ने एक अनुसन्धान में यह सिद्ध किया की शंख ध्वनी कीटाणुओं को नष्ट करने में सक्षम हैं | कीटाणुओं को नष्ट करने की उत्तम ओषधि हैं | शंख में भरा जल घर में छिडकने से वातावरण शुद्ध होता हैं |

शंख जल का नित्य पान करने से स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता हैं | इससे हड्डिया मजबूत होती हैं |

महाभारत में युद्ध के प्रारम्भ और अंत में शंख बजाने का विधान था | इससे आस पास का वातावरण शुद्ध होता हैं तथा भय नहीं रहता |

शख वादन करने से वाणी दोष दूर होता हैं | भगवान विष्णु का शंख वामावर्ती शंख माना जाता हैं | इसके बिना भगवान विष्णु की आराधना सम्पन्न नहीं होती |

घर में शंख वादन करने से नकारात्मक उर्जा का विनाश होता हैं तथा समारात्मक उर्जा का संचार होता हैं |

शंख वादन के वैज्ञानिक कारण

वैज्ञानिक रूप से भी शंख की प्रमाणिकता सिद्ध हो चुकी हैं | वैज्ञानिको का मानना हैं की शंख ध्वनी के प्रभाव में सूर्य की किरणें बाधक होती हैं | प्रात व सांयकाल जब सूर्य की किरने निस्तेज होती ही तभी शंख बजाने का विधान हैं | इससे वातावरण शुद्ध होता हैं | आयुर्वेद के अनुसार शंखोदक भस्म से पेट की बिमारिया ,पीलिया , पथरी , आदि रोग ठीक होते हैं |

शंख ध्वनी जहाँ तक जाती हैं , वहाँ तक अनेक सूक्ष्म कीटाणुओं का नाश हो जाता हैं | वातावरण शुद्ध होता हैं | शंख बजाने वाले व्यक्ति को कभी साँस समन्धित बिमारिया नहीं होती हैं | प्रात व सांयकाल जब सूर्य की किरने निस्तेज होती ही तभी शंख बजाने का विधान हैं | इससे वातावरण शुद्ध होता हैं | बर्लिन युनिवर्सिटी ने एक अनुसन्धान में यह सिद्ध किया की शंख ध्वनी कीटाणुओं को नष्ट करने में सक्षम हैं | कीटाणुओं को नष्ट करने की उत्तम ओषधि हैं | शंख में भरा जल घर में छिडकने से वातावरण शुद्ध होता हैं | शंख जल का नित्य पान करने से स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता हैं | इससे हड्डिया मजबूत होती हैं | महाभारत में युद्ध के प्रारम्भ और अंत में शंख बजाने का विधान था | इससे आस पास का वातावरण शुद्ध होता हैं तथा भय नहीं रहता | शंख वादन करने से वाणी दोष दूर होता हैं | भगवान विष्णु का शंख वामावर्ती शंख माना जाता हैं | इसके बिना भगवान विष्णु की आराधना सम्पन्न नहीं होती | घर में शंख वादन करने से नकारात्मक उर्जा का विनाश होता हैं तथा समारात्मक उर्जा का संचार होता हैं |

 

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