तुलसी माता की कहानी | Tulsi Mata Ki Kahani Kartik maas

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Last updated on October 25th, 2018 at 07:59 pm

बुढ़िया माई की कहानी

कार्तिक महीने में एक बुढिया माई तुलसीजी को सींचती और कहती कि हे तुलसी माता ! सत की दाता मैं तेरा बिडला सीचती हूँ , मुझे बहु दे , पीताम्बर की धोती दे , मीठा मीठा गास दे , बैकुंठा में  वास दे , चटक की चाल दे ,  पटक की मोत दे , चंदन का काठ दे , रानी सा राज दे , दाल भात का भोजन दे ग्यारस की मोंत दे , कृष्ण जी का कन्धा दे | तब तुलसी माता यह सुनकर सूखने लगी तो  भगवान ने पूछा – की हे तुलसी ! तुम क्यों सुख़ रही हो ? तुलसी माता ने कहा कि एक बुढिया रोज आती है और यही बात कह जाती है | में सब बात तो पूरा कर दूँगी लेकिन कृषण का कन्धा कहा से लाऊंगी  | तो भगवान बोले जब वो मरेगी तो में अपने आप कंधा दे आऊगा | तू बुढिया माई से कह देना  |

बाद में बुढिया माई मर गई | सब लोग आ गये | जब माई को ले जाने लगे तो वह किसी से न उठी | तब भगवान एक बारह बरस के बालक का रूप धारण करके आये |  बालक ने कहा में कान में एक बात कहूँगा  तो बुढिया माई उठ जाएगी | बालक ने कान में कहा , बुढिया माई मन की निकाल ले , पीताम्बर की धोती ले , मीठा मीठा गास ले , बेकुंठा का वास ले , चटक की चल ले , पटक की मोत ले ,  कृषण जी का कन्धा ले यह सुनकर बुढिया माई हल्की हो गई | भगवान ने कन्धा दिया और बुढिया माई को मुक्ति मिल गई | हे तुलसी माता जेसे बुढिया माई को मुक्ति दी वेसे सबको देना |

इल्ली घुण की कहानी के बाद तुलसी माता व लपसी तपसी की कहानी सुने

                                                                   ||  जय तुलसी माता की ||

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