षट्तिला एकादशी [ माघ मास ] Shattila Ekadashi [ Magh Mas }

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Last updated on April 20th, 2019 at 11:51 am

षट्तिला एकादशी [ माघ मास ]

Shattila Ekadashi [ Magh Mas }

युधिष्ठर ने पूछा – स्वामी ! माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या नाम हैं ? उसकी क्या विधि हैं तथा इस दिन किसकी पूजा की जाती हैं ? तथा उससे किस फल की प्राप्ति होती हैं ? यह बतलाइए |

भगवान वासुदेव ने कहा – हे राजन ! माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी को षट्तिला एकादशी के नाम से जाना जाता हैं इस व्रत में भगवान जनार्दन का पूजन किया जाता हैं | अब मैं इस एकादशी का महात्म्य सुनाता हूँ ध्यान पूर्वक सुने |

राजन इस व्रत को विधि पूर्वक करना चाहिए | यह सब पापों को हरने वाली उत्तम तिथि हैं | समस्त संसार के अधिष्ठदाता भगवान नारायण इस तिथि के देवता हैं | सम्पूर्ण संसार में इसके समान कोई  तिथि नहीं हैं , व्रत नहीं हैं | दालभ्य ने पूछा – ब्रह्मन् ! मनुष्य लोक आकर लोग पाप कर्म करते हैं | पराये धन को चुराते हैं | दुसरो को कष्ट देते हैं इन सब पापों से मुक्त होने का उपाय बतलाइये |  पुलस्त्य मुनि बोले –   हे महाभाग !  आपने संसार के कल्याण के लिए उत्तम प्रश्न किया हैं  बतलाता हूँ सुनो | माघ मास के प्रारम्भ होने पर स्नानादि से निर्वत होकर इन्द्रियों को वश में कर काम , क्रोध ,  लोभ , मोह , अहंकार आदि को अपने मन से त्याग कर शुद्ध जल से हाथ पैर धो कर भगवान देवाधिदेव श्री विष्णु का स्मरण करे |ऐसा गोबर ले जो जमीन पर नहीं गिरा हो उसमें तिल और कपास मिलाकर 108 पिंड बना ले | फिर माघ मास में पूर्वाषाढा व मूल नक्षत्र आ जाये तो कृष्ण पक्ष की षट्तिला एकादशी का नियम ग्रहण करे | श्रद्धा व भक्ति से स्नानादि से निर्वत होकर भगवान श्री विष्णु का पूजन करे | रात्रि जागरण करे , हवन करे , धुप , दीप , अगर , कपूर , नैवैद्ध्य से शंख चक्र गदा से सुशोभित श्री हरि का पूजन करे | तत्पश्चात भगवान श्री कृष्ण का स्मरण करते हुए बारम्बार श्री कृष्ण नाम का उच्चारण करते हुए नारियल , पेठे , बिजोरे के फल से श्री हरि का पूजन कर अर्ध्य चढाये | यदि पूजा सामग्री का अभाव हो तो सुपारी ही उत्तम हैं | फिर प्रार्थना करे ! हे कृष्ण ! हे भगवान कृष्ण आप दयालु हैं | हम पर दया कीजिये आप हमारे आश्रय डाता हैं | हे कमल नयन भगवान आपको मेरा बारम्बार नमस्कार | विश्वभावन आपको नमस्कार | हे महापुरुष आपको नमस्कार ! हे पूर्वज आपको नमस्कार हे जगत्पते ! मेरे दिए अर्ध्य , पूजा को लक्ष्मी सहित नमस्कार करिये | फिर  जल से भरा कलश ,वस्त्र ,आभूषन ब्राह्मण को दक्षिणा स्वरूप देकर इस प्रकार प्रार्थना करे |

हे भगवान श्री कृष्ण ! आप मुझ पर प्रसन्न होइये | यथा शक्ति श्रेष्ठ ब्राह्मण को काली गाय का दान करे तथा तिल से भरा पात्र भी दान करे | उन तिलों के बोने पर उनसे जितने तिल उत्पन्न होते हैं उतने हजार वर्षो तक स्वर्ग में स्थान प्राप्त होता हैं | तिल का उबटन लगाये , तिल मिश्रित जल से स्नान करे , तिल से हवन करे तिल मिश्रित जल का पान करे , तिल भोजन में ले इस प्रकार छ: कामो में तिल का उपयोग करने से यह एकादशी  “ षट्तिला एकादशी “ कहलाती हैं | जो सब पापों का हरण करने वाली हैं |      

 || सचितान्न्द भगवान विष्णु की सदा ही जय हो ||

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